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सदा खुश रहना है तो सुबह ही कर लें मन की प्रोग्रामिंग – बी.के. प्रह्लाद

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निःशुल्क ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से लोगों को मन की शांति और सकारात्मकता के लिए सिखा रहे है मेडिटेशन

सदा खुश रहना है तो सुबह ही कर लें मन की प्रोग्रामिंग – बी.के. प्रह्लाद

ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय लश्कर ग्वालियर के द्वारा निःशुल्क ऑनलाइन राजयोग मेडिटेशन कोर्स की शुरुवात की गयी है जिसके माध्यम से विभिन्न वर्ग के अनेकानेक लोग अपने घर बैठे पिछले 2 महीने से राजयोग मेडिटेशन का लाभ ले रहे है|
ब्रह्माकुमारीज लश्कर सेवाकेंद्र संचालिका आदरणीया राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में लोगो को तनावमुक्त, शांत व सुखी रहने के लिए मेडिटेशन एक अच्छा उपाय है | यदि हम थोडा समय अपनी दिनचर्या में से मेडिटेशन के लिए निकालते है तो हम अपने आपको लम्बे समय तक मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रख सकते हैं| क्योकि यह चुनौतीपूर्ण समय हमारा वर्तमान है लेकिन हमारे आज के संकल्प से सुसज्जित होने वाला स्वर्णिम भविष्य हमारा इन्तजार कर रहा है अतः आज के इस अमूल्य समय को नकारात्मक चिंतन, तनाव और भय में व्यर्थ न गवाएं बल्कि अपने घर पर परिवार के साथ समय बिताते हुए कुछ रचनात्मक कार्य करें और अपने वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनायें |

इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के अनेकानेक लोगों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए मोटिवेशनल ट्रेनर और मेडिटेशन एक्सपर्ट बी.के. प्रह्लाद भाई ने बताया कि आज हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है, सकारात्मक रहना चाहता है लेकिन रह नहीं पाता है उसका कारण है बाहरी परिस्थियों का हावी होना। यदि व्यक्ति के जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा होता है लेकिन अचानक कोई ऐसी परिस्थिति आती है जो उसके अनुकूल नहीं है तो उसको बड़ा मानते हुए वह उससे हार मान लेता है और दु:खी हो जाता है जबकि वास्तविकता यह है कि हमारी स्वस्थिति इतनी शक्तिशाली होनी चाहिए कि बाहर के वातावरण का, परिस्थितियों का हम पर प्रभाव न पड़े। और यह तब हो सकता है जब हम अपनी सोच को अच्छा या सकारात्मक रखें क्योंकि हम जैसा सोचते है हमारे जीवन में वैसा ही होने लग जाता है| हमारी सोच ही हमारे जीवन का निर्धारण करती है |
सृष्टी एक रंगमंच है और हम सब इसमें अभिनयकर्ता है जिसे हम आत्मा, रूह, प्राण या एनर्जी कहते हैं और शरीर एक माध्यम है जिसके द्वारा हम अभिनय कर रहे है | जैसे बाहर के अभिनय के लिए प प्रैक्टिस या अभ्यास की आवश्यकता होती है बिना अभ्यास के आप अभिनय को अच्छे से नहीं निभा सकते। ठीक उसी प्रकार हम जैसा अपना दिन व्यतीत करता चाहते हैं या दिन भर में जो कुछ अच्छा महसूस करना चाहते हैं उसके लिए हमें सुबह ही उसकी स्क्रिप्ट बना लेनी चाहिए और उसी आधार पर अपने मन को सकारात्मक चिंतन देकर मन की प्रोग्रामिंग करनी चाहिए। तथा बुद्धि रुपी नेत्र के द्वारा उसको चित्रित (विजुलाईज) करना चाहिए| ऐसा करने पर आप जैसा दिन व्यतीत करना चाहते है वैसा आपके साथ हो सकेगा और आप सदा खुश रह सकेंगें | क्योंकि हमारे अन्दर तीन शक्तियां होती है जिनके द्वारा हम कार्य करते है – मन, बुद्धि और संस्कार | मन और बुद्धि को चेतन मन कहते है जबकि संस्कार को अवचेतन मन कहते है| हम 10 प्रतिशत कर्म चेतन मन के द्वारा करते है जबकि 90 प्रतिशत कर्म अवचेतन मन के द्वारा करते है | और अवचेतन मन में सारा दिन वही विचार रहते है जो आपने सुबह -सुबह चेतन मन में उत्पन्न किये थे| इसलिए कभी अपने भाग्य को दोषारोपण न करके सदैव सकारात्मक ही सोचें | इसके आलावा सात गुण होते है 1.ज्ञान 2.पवित्रता 3.शांति 4.प्रेम 5.ख़ुशी/सुख 6.आनंद 7.शक्ति इन्हीं गुणों की अनुभूति करने के लिए हम जीवन भर प्रयासरत रहते है जिनका आत्मा में प्रतिशत घटने से दुःख व् अशांति कि अनुभूति होती है लेकिन यह बाहर से खरीदने बाली वस्तु नहीं है जो खरीदकर उनका प्रतिशत बढ़ा दें बल्कि यह हमारे आन्तरिक गुण हैं जिनका प्रतिशत प्रतिदिन मेडिटेशन के अभ्यास से बढाया जा सकता है और अपने जीवन को आनंदित करके खुश रहा जा सकता है |

मेडिटेशन के लिए दिन की शुरुवात में इस तरह सकारात्मक चिंतन करें –
मै एक शांत स्वरुप आत्मा हूँ…… शांति मेरा स्वाभाव है……. मै पवित्र आत्मा हूँ…….. मेरे मन, वाणी और कर्म में पवित्रता समाई हुई है……..मै ज्ञान स्वरुप आत्मा हूँ….. हर कर्म को श्रेष्ठ रीति से करने का ज्ञान मेरे पास है……मै प्रेम स्वरूप आत्मा हूँ…….. सभी के प्रति प्रेम भाव रखना मेरा स्वाभाव है……..मै सदैव खुश रहने बाली आत्मा हूँ………. ख़ुशी मेरा अपना संस्कार है………मैं आनन्द स्वरुप हूँ………. मुझे अतीन्द्रीय सुख का अनुभव हो रहा है……….मै शक्ति स्वरुप हूँ……… हर प्रकार की बुराई और विकृति को भष्म करने कि शक्ति मुझमें है…….मै पुर्णतः स्वस्थ्य आत्मा हूँ………. मन से और शरीर से…………मेरी वाणी में मधुरता है……….. मुझे सभी से अच्छे बोल बोलने है………मेरे स्वाभाव में सरलता है……… अर्थात मेरा व्यबहार सभी के प्रति बहुत सरल है………..मै महशूस कर रहा हूँ कि आज का मेरा दिन बहुत अच्छा व्यतीत हो रहा है ………..मेरे परिवार के सभी सदस्य भी मुझसे मिलकर बहुत प्रसनं हो रहे है………..जो भी लोग आज मेरे संपर्क में आयेंगें मै उन सबके प्रति अपनी शुभकामनायें रख रहा हूँ……..मै सर्वशक्तिमान परमपित्ता परमात्मा की संतान हूँ……. उनसे निकलती हुई पवित्र उर्जा और शक्तिशाली उर्जा के प्रकम्पन्न मेरे ऊपर आ रहे है जिससे मै अपने आपको शक्तिशाली महशूस कर रहा हूँ……… मेरे पूरे शरीर में एक सकारातमक उर्जा फ़ैल रही है……. मेरे चारो ओर यह उर्जा एक सुरक्षा कवच के रूप में है अब बाहर कि कोई भी निगेटिविटी या व्यर्थ बातें मुझे डिस्टर्ब नहीं कर सकती… में. पूरी तरह से सुरक्षित हूँ….. मुझसे निकलकर यह पवित्र उर्जा और सकारात्मक उर्जा चारो ओर वातावरण में फ़ैल रही है मेरे आसपास का वातावरण शक्तिशाली हो रहा है | सभी लोग अपने आप को इस वातावरण में स्वस्थ्य और शक्तिशाली महसूस कर रहे है……. पूरा विश्व एक परिवार है…….. मै सभी के लिए स्वस्थ्य रहने कि…….. और सभी के कल्याण की कामना करता हूँ………..सबकुछ बहुत अच्छा हो रहा है……… आदि आदि |

इसके अलाबा मै जो अच्छा सोच सकता हूँ वह चिंतन करें ऐसा करने पर आप सकारात्मक उर्जा से भर जायेंगे|
इस तरह से हम अनेकानेक सकारात्मक विचारों से अपने दिन कि शुरुवात करें तो आप देखेंगे कि आपका पूरा दिन बहुत अच्छा व्यतीत होगा और आपको भी ख़ुशी की अनुभूति होगी |

इसके आलावा वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक बी. के. डॉ. गुरचरण भाई ने भी सभी को उमंग उत्साह दिलाते हुए कहा कि जीवन में अगर तनाव मुक्त रहना है तो अपनी दूसरों से एक्सपेक्टेशन अर्थात उम्मीदों को कम करें और परिस्थितियों के साथ एडजस्ट अर्थात समायोजित होना सीखें अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित बनायें तो हर परिस्थिति में हम जीवन का भरपूर आनंद ले सकते है |

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है। कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं…

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई
जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर
क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी

ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है।
कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है।
ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं या नशे का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नशा उनके दुख, तनाव और परेशानियों को कम कर देगा, लेकिन वास्तव में नशा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा बना देता है। हमें यह समझना होगा कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हमारे साथ हमारा परिवार भी जुड़ा हुआ है। माता-पिता की उम्मीदें, बच्चों का भविष्य, जीवनसाथी का विश्वास। जब एक व्यक्ति नशे की लत में पड़ता है, तो केवल वही नहीं टूटता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटने लगता है। इसलिए हमें अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी शक्ति दी है, वह है सोचने और समझने की क्षमता। यह क्षमता किसी और प्राणी में नहीं है। यदि समझ होते हुए भी हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो वह हमारी कमजोरी है, न कि मजबूरी। जब हम अपनी समझ का सही उपयोग करते हैं, तभी हम नशे जैसी बुराइयों से खुद को और अपने समाज को बचा सकते हैं।
डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर नशा नहीं करेंगे तो मन नहीं लगेगा, दिमाग शांत नहीं रहेगा, काम में ध्यान नहीं आएगा। लेकिन यह केवल एक भ्रम है, सच्चाई नहीं। नशा मन को स्थिर नहीं करता, बल्कि उसे और बेचैन बना देता है। कुछ समय के लिए यह दर्द को दबा देता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को खोखला कर देता है।
वर्तमान में अनेक प्रकार से नशा हमारे समाज में पांव फैलाता जा रहा है जिनके द्वारा आपके शरीर को आपके दिमाग को नुकसान होता है आपके व्यवहार में भी बदलाव आता है। एडिक्शन की वजह से लीवर खराब हो सकता है। किडनी, पेनक्रियाज, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां या फिर हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना ही बेहतर है यदि आप नशे के शिकार है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसे छोड़ सकते है
शिविर का समापन नशा मुक्त, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
यह सम्मान पूर्व विधायक श्री मुन्नालाल गोयल, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री मान. श्री तुलसी सिलाबट, बीजेपी जिलाध्यक्ष अध्यक्ष जय प्रकाश राजोरिया, अनेकानेक धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में बीके प्रहलाद भाई नें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकश ड़ालते हुए उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को सुन्दर बनाने कि बात कही तो वहीं अन्य अतिथियों नें भी इस विषय पर प्रकश डाला।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के भाई एवं बहनें हुए शामिल

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शासकीय उ.मा.वि. शिक्षानगर में सामुहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से बीके प्रहलाद भाई, बीके अंजलि बहन, बीके योगेश भाई सहित अन्य भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका सिंह घुरैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, जिला पंचायत सीईओ श्री सोजान सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, स्कूल के विद्यार्थी, पतंजलि संस्थान के सदस्य आदि शामिल रहे।

 

 

 

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