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माधवगंज स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “सकारात्मक सोच से खुशनुमा जीवन” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

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जीवन में वास्तविक मूल्य चीज़ों का नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, स्वभाव का है 

ग्वालियर। माधवगंज स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “सकारात्मक सोच से खुशनुमा जीवन” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर संजय द्विवेदी, आईटीएम विश्व विद्यालय के प्राध्यापक डॉ मनीष जैसल, प्रेरक वक्ता एवं राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई उपस्थित थे।

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि हमारे संस्कारों को दिव्य बनाने वाला सबसे श्रेष्ठ भोजन है, परमात्मा का नित्य सत्संग। जैसे शरीर को भोजन न मिले तो वह कमजोर होने लगता है, वैसे ही आत्मा को सत्संग न मिले तो वह थक जाती है, उलझ जाती है, और धीरे-धीरे जीवन में खालीपन महसूस होने लगता है। दीदी ने आगे कहा कि यदि हम कुछ समय ईश्वर की याद, सत्संग और आत्मचिंतन को नहीं देते, तो मन का शोर शांत नहीं होगा। मन को साधन, पैसा, प्रतिष्ठा नहीं चाहिए, उसे चाहिए परमात्म-शक्ति, प्रेम, स्थिरता और मार्गदर्शन। सच्ची खुशी और शांति तो प्रतिदिन ईश्वर की याद से ही आ सकती है।
आज हम सभी ने भौतिक सुख सुविधाओं के सभी साधन तो इक्कट्ठे कर लिए है, परन्तु शरीर के पास सब कुछ हो जाए, लेकिन मन खाली हो, तो जीवन में आनंद की अनुभूति नहीं हो सकती। इसके लिए चाहिए परमात्मा की याद। और परमात्म याद वह रोशनी है जो अंधेरों को तोड़ती है, टूटे मन को जोड़ती है, बिखरे विचारों को सँवारती है और व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। जब मन परमात्मा की याद से जुड़ता है, तब जीवन में करुणा आती है, संस्कार दिव्य होते हैं, क्रोध मिटता है, और व्यक्ति हर परिस्थिति में स्थिर रहना सीखता है। दुनिया की भीड़ आपको थका देगी, लेकिन परमात्मा की याद आपको उठाएगी और आगे बढ़ाएगी।

प्रोफ़ेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि यह एक ऐसी जगह है जहां से राजयोग का ज्ञान प्राप्त होता हैं राजयोग हमारी दुनिया को एक सुंदर दुनिया में बदलने का अभ्यास हैं हम सब चाहते हैं कि बेहतर दुनिया बने उसमें सब लोग सुख शांति और आनंद के साथ रहे उस आनंद की खोज में ही इस राजयोग का विकास हुआ है।

आईटीएम विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मनीष जैसल ने कहा कि मेरे लिए तो सौभाग्य की बात है कि मुझे समय प्रति समय यहाँ आने का मौका मिलता है। इस कैंपस के अंदर आते ही एक अलग प्रकार की शांति की अनुभूति होती है दुनिया में सबसे अच्छी जगह यही है जहां पर बहुत कुछ प्राप्त कर सकते है और अपना परिवर्तन कर सकते है।

मोटिवेशनल स्पीकर बीके प्रहलाद भाई ने कह कि इंसान इस दुनिया में बहुत कुछ करता है। अपने सपने पूरे करता है, रिश्तों को निभाता है, अनुभव की लेन देन करता है, जीवन को सुंदर बनाने के प्रयास में रहता है। लेकिन हमारे पास जो जमा होता है वह है हमारे श्रेष्ठ कर्म, हमारे संस्कार और हमारी अच्छाई जो हमारे साथ भी जाती है। इसलिए जीवन में वास्तविक मूल्य चीज़ों का नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, हमारे स्वभाव और हमारे आंतरिक भावों का है। जीवन में सबसे बड़ा शत्रु क्रोध है। क्रोध इंसान की बुद्धि को खराब कर देता है, रिश्तों को तोड़ देता है और मन की शांति को छीन लेता है। क्रोध क्षणिक होता है, लेकिन उसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। आज दुनिया में जितनी मानसिक और शारीरिक बीमारियाँ बढ़ रही हैं, उनमें क्रोध, तनाव और आंतरिक बेचैनी सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं। गुस्सा न केवल शब्दों को कड़वा बनाता है, बल्कि आत्मा को भी कमजोर कर देता है। आज मनुष्य बाहरी रूप से बहुत कुछ हांसिल कर रहा है। धन, साधन, तकनीक, सुविधाएँ लेकिन आंतरिक रूप से खाली हो रहा है। मन के अंदर शांति नहीं, संतुलन नहीं, स्थिरता नहीं। हम बाहरी दुनिया को जीतने में लगे हैं, लेकिन अपनी ही भीतरी दुनिया से हारते जा रहे हैं। यही कारण है कि मन थक जाता है। इस खालीपन से बाहर निकलने के लिए हमें अपने भीतर रोशनी जगानी होगी धैर्य की, प्रेम की, क्षमा की, और सबसे महत्वपूर्ण, आत्म-जागृति की। जब हम क्रोध को छोड़कर करुणा अपनाते हैं, जब हम शिकायत छोड़कर आभार अपनाते हैं, जब हम बाहरी दिखावे से हटकर अपने भीतर झाँकते हैं तभी जीवन में सच्चा संतोष आता है।
कार्यक्रम में अनेकानेक लोग उपस्थित थे।

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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय आध्यात्मिक ज्ञान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा और राजयोग ध्यान के साथ साथ विगत कई वर्षो से शासन, प्रशासन के साथ मिलकर अपने स्वयं सेवकों के साथ लगातार पर्यवारण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण एवं नशामुक्ति अभियान जैसे अनेक सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बीते रोज बाल भवन में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान में जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
जिसमें ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के वरिष्ठ प्रेरक वक्ता और समाजसेवी बीके प्रहलाद भाई को भी सम्मान दिया गया।
यह सम्मान संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर बीके पवन ने प्राप्त किया।
यह सम्मान सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में दिया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जीडीए के अध्यक्ष श्री मधुसूदन सिंह भदौरिया, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन, साडा अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, मेला उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह सहित जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका घुरैया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत व अपर आयुक्त नगर निगम श्री टी. प्रतीक राव मुख्यरूप से उपस्थित थे।

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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

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ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय आध्यात्मिक ज्ञान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा और राजयोग ध्यान के साथ साथ विगत कई वर्षो से शासन, प्रशासन के साथ मिलकर अपने स्वयं सेवकों के साथ लगातार पर्यवारण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण एवं नशामुक्ति अभियान जैसे अनेक सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बीते रोज बाल भवन में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान में जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
जिसमें ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के वरिष्ठ प्रेरक वक्ता और समाजसेवी बीके प्रहलाद भाई को भी सम्मान दिया गया।
यह सम्मान संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर बीके पवन ने प्राप्त किया।
यह सम्मान सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में दिया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जीडीए के अध्यक्ष श्री मधुसूदन सिंह भदौरिया, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन, साडा अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, मेला उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह सहित जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका घुरैया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत व अपर आयुक्त नगर निगम श्री टी. प्रतीक राव मुख्यरूप से उपस्थित थे।

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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