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ध्यान व्यवहार को शांत, उत्तम और श्रेष्ठ बनाकर संबंधों में सुधार लाता है – ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी

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ध्यान व्यवहार को शांत, उत्तम और श्रेष्ठ बनाकर संबंधों में सुधार लाता है – ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी

ध्यान से व्यक्ति अपने मन और विचारों को नियंत्रित कर सकता है – बीके प्रहलाद भाई
संतुलित, स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने में मदद करता है – बीके डॉ गुरचरण सिंह

विश्व ध्यान दिवस पर ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर हुआ कार्यक्रम आयोजित

ग्वालियर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून भरी नींद यदि चाहिए है, तो मेडिटेशन के लिए समय अवश्य निकालें। मनुष्य यदि तनाव, चिंता, भय आदि से अपने को मुक्त रखना चाहता है तो उसे प्रतिदिन मेडिटेशन या ध्यान अवश्य करना चाहिए। उक्त बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने “विश्व ध्यान दिवस” के अवसर पर “आंतरिक शांति, वैश्विक सद्भाव” थीम के अंतर्गत, पुराना हाई कोर्ट लाइन स्थित ब्रह्माकुमारीज संगम भवन राजयोग ध्यान केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। दीदी ने आगे कहा कि राजयोग ध्यान आत्मा के मूल गुणों सत्यता, पवित्रता, त्याग, सहनशीलता, धैर्य, दया, करुणा और सेवा आदि को जाग्रत करता है। ध्यान व्यवहार को शांत, उत्तम और श्रेष्ठ बनाकर संबंधों में सुधार लाता है। तथा मन की मलिनता को दूर करता है। राजयोग ध्यान न केवल स्वयं का सत्य परिचय कराता है, वल्कि मन की तार परमात्मा से जोड़कर दिव्य शक्ति और प्रेरणा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम भी है। दीदी ने कहा कि सयुंक्त राष्ट्र ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया। जो मानवता की सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल वैश्विक स्तर पर मेडिटेशन के महत्व को जानने में तथा लोगो को दैनिक जीवन में मेडिटेशन को अपनाने में मदद करेगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके डॉ गुरचरन सिंह ने कहा कि ध्यान केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल हमारी मानसिक और शारीरिक समस्याओं का समाधान करता है बल्कि हमें आत्म उन्नति की ओर ले जाता है। आज के जीवन में ध्यान एक वरदान की तरह है, जो हमें संतुलित, स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने में मदद करता है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा सिखाए जाने वाले राजयोग ध्यान से हमारा आत्म विश्वास बढ़ता है साथ ही जीवन में सकारात्मकता आती है और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति मिलती है।
कार्यक्रम में प्रेरक वक्ता एवं वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई ने कहा कि ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसके द्वारा व्यक्ति अपने मन और विचारों को नियंत्रित करता है। ध्यान बाहरी दुनिया से जुड़ने की बजाय व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्म विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है। यह मन और आत्मा को सशक्त बनाने की प्राचीन विधि है। ध्यान का मूल उद्देश्य मन को स्थिर और शांत बनाना ही है। ध्यान से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। बुद्धि दिव्य बन जाती है और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है। ध्यान काफी हद तक हमें शारीरिक रुप से स्वस्थ रहने में भी मदद करता है। प्रतिदिन ध्यान के अभ्यास से मन शक्तिशाली तथा शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बनता है।

कार्यक्रम में लोगों के प्रश्नों के दिये जवाब –
प्रश्न 1 – जब ध्यान करने बैठते है तो मन भागता क्यों है?
उत्तर – ज्यादातर लोगों के जीवन में व्यर्थ चिंतन बहुत चलता है। अपने को कभी समय ही नहीं दे पाते।  और जब कभी शांति में बैठने या ध्यान में बैठनें की कोशिश करते है तो फिर वह बातें एक साथ आती है। इसलिए प्रतिदिन थोड़ा समय अपने लिए निकाले तो आप देखेंगे कि कुछ दिन में ही आपके व्यर्थ विचारों की गति धीमी होने लगेगी। और सकारात्मक चिंतन से मन एकाग्र होने लगेगा।
प्रश्न 2 – मेडिटेशन बहुत कठिन लगता है?
उत्तर – मेडिटेशन कठिन नहीं है बल्कि बहुत सरल है। मेडिटेशन को योग या याद भी कहते है जहाँ दो चीजों का मिलन है वह योग है। जैसे माँ बेटे को याद कर रही है या बेटा माँ या पिता को याद कर रहा है। तो यह भी एक प्रकार का योग है लेकिन यह संबंधियों के साथ योग है। लेकिन जब हम स्वयं को आत्म समझ परमात्मा को याद करते है तो यह परमात्मा के साथ योग अथवा ध्यान कहेंगे।
संबंधियों को याद करना आसान होता है, क्योंकि हम उनके साथ रहते है उनके बारे में बहुत कुछ जानते है। लेकिन परमात्मा से योग लगाना इसलिए कठिन लगता है क्योकि वह दिखाई नहीं देते। और उनके नाम, रूप, देश, काल और कर्तव्य से भी हम पूरी तरह से परिचित नहीं होते। तो जब हम उनके गुणों का चिंतन करते है उनके बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते है। तो हम आसानी से अपने मन की तार उनसे जोड़ सकते है। क्योंकि वह हमारे परमपिता, परम शिक्षक, परम सद्गुरु है, परमपिता परमात्मा शिव निराकार ज्योतिबिन्दु स्वरूप है अर्थात एक दिव्य प्रकाश पुंज के रूप में है, वह सर्वोच्च है, सर्व शक्तिवान है, सर्वोपरि है, सर्वज्ञ है, ज्ञान गुण शक्तियों में अनंत है, दिव्य बुद्धि दाता है, दुःख हर्ता सुख कर्ता है। यह सब जानने से ही हम सहज ही उनसे जुड़ सकते है या उन्हें याद कर सकते है।
प्रश्न 3 – दुनिया में कितने प्रकार के योग है।
उत्तर – योग के अनेक प्रकार है और हर योग का अपना महत्व है।
जैसे – राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग, हठयोग,  आदि।
हम यहाँ पर राजयोग की बात कर रहें है। यह वह योग है जो भगवान ने अर्जुन को सिखाया था। राजयोग अर्थात कर्मेन्द्रियों पर राज करने वाला योग, आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने वाला योग।
प्रश्न 4 – कर्मयोग क्या है?
कर्मयोग अर्थात कर्म करते हुए परमात्मा को याद करना। जिससे हमारे सारे कर्म श्रेष्ठ होते है। इसलिए “योगः कर्मसु कोशलं” कहा गया है। अर्थात योग से कर्म में कुशलता आती है। परमात्मा की याद में किये हुए कर्म ही पुण्य कर्म बनते है।

कार्यक्रम के अंत में बीके आदर्श दीदी ने सभी को 15 मिनिट तक राजयोग ध्यान की गहन अनुभूति भी सभी को कराई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताएं बहनें एवं भाई उपस्थित थे।

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है। कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं…

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई
जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर
क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी

ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है।
कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है।
ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं या नशे का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नशा उनके दुख, तनाव और परेशानियों को कम कर देगा, लेकिन वास्तव में नशा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा बना देता है। हमें यह समझना होगा कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हमारे साथ हमारा परिवार भी जुड़ा हुआ है। माता-पिता की उम्मीदें, बच्चों का भविष्य, जीवनसाथी का विश्वास। जब एक व्यक्ति नशे की लत में पड़ता है, तो केवल वही नहीं टूटता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटने लगता है। इसलिए हमें अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी शक्ति दी है, वह है सोचने और समझने की क्षमता। यह क्षमता किसी और प्राणी में नहीं है। यदि समझ होते हुए भी हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो वह हमारी कमजोरी है, न कि मजबूरी। जब हम अपनी समझ का सही उपयोग करते हैं, तभी हम नशे जैसी बुराइयों से खुद को और अपने समाज को बचा सकते हैं।
डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर नशा नहीं करेंगे तो मन नहीं लगेगा, दिमाग शांत नहीं रहेगा, काम में ध्यान नहीं आएगा। लेकिन यह केवल एक भ्रम है, सच्चाई नहीं। नशा मन को स्थिर नहीं करता, बल्कि उसे और बेचैन बना देता है। कुछ समय के लिए यह दर्द को दबा देता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को खोखला कर देता है।
वर्तमान में अनेक प्रकार से नशा हमारे समाज में पांव फैलाता जा रहा है जिनके द्वारा आपके शरीर को आपके दिमाग को नुकसान होता है आपके व्यवहार में भी बदलाव आता है। एडिक्शन की वजह से लीवर खराब हो सकता है। किडनी, पेनक्रियाज, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां या फिर हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना ही बेहतर है यदि आप नशे के शिकार है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसे छोड़ सकते है
शिविर का समापन नशा मुक्त, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
यह सम्मान पूर्व विधायक श्री मुन्नालाल गोयल, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री मान. श्री तुलसी सिलाबट, बीजेपी जिलाध्यक्ष अध्यक्ष जय प्रकाश राजोरिया, अनेकानेक धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में बीके प्रहलाद भाई नें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकश ड़ालते हुए उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को सुन्दर बनाने कि बात कही तो वहीं अन्य अतिथियों नें भी इस विषय पर प्रकश डाला।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के भाई एवं बहनें हुए शामिल

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शासकीय उ.मा.वि. शिक्षानगर में सामुहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से बीके प्रहलाद भाई, बीके अंजलि बहन, बीके योगेश भाई सहित अन्य भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका सिंह घुरैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, जिला पंचायत सीईओ श्री सोजान सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, स्कूल के विद्यार्थी, पतंजलि संस्थान के सदस्य आदि शामिल रहे।

 

 

 

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