Indraganj Lashkar
“खेलेगा इंडिया तो जीतेगा इंडिया” कार्यक्रम आयोजित – ब्रह्माकुमारीज़ ग्वालियर(19-02-2022)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की भगिनी संस्थान राजयोगा एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के स्पोर्ट्स प्रभाग के द्वारा “आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर “खेलेगा इंडिया जीतेगा इंडिया” का आयोजन किया गया । यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय “टग ऑफ वार डे” के उपलक्ष में विशेष रूप से स्थानीय सेवा केंद्र ओल्ड हाई कोर्ट स्थित संगम भवन में आयोजित किया गया । जिसमें खेल जगत से जुड़े हुए विशिष्ट महानुभावों ने अपने अनुभव व्यक्त किए । कार्यक्रम में विशेष रूप से किस प्रकार से हम जीतने का दृष्टिकोण अपने जीवन में धारण कर सकते हैं इस बारे में हमारे विशेषज्ञों ने अनेक प्रकार के टिप्स दिए ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईटीएम यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स एजुकेशन के डीन डॉ प्रोफेसर कपिल दवे जी ने कहा कि हमारे जीवन को स्वस्थ रुप से आगे बढ़ाने के लिए खेलकूद का बहुत ही महत्व है । यहां तक कि अगर हम इस महामारी के समय पर देखें तो वह भाई बहने जो कि शारीरिक रूप से एक्टिव थे उन्हें इस महामारी ने कम प्रभावित किया । इसी तथ्य को सामने रखते हुए हमें स्पोर्ट्स को अपने जीवन में विशेष स्थान देना चाहिए, जैसे हम और चीजों को महत्व देते हैं । रिसर्च में यहां तक भी देखा गया है कि जो माताएं खेलकूद में ध्यान देती हैं तो उनके होने वाले बच्चे भी शारीरिक मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पोर्ट्स प्रभाग के नेशनल कोऑर्डिनेटर बी के राजयोगी डॉ जगबीर सिंह भाई जी ने अपने अनुभव व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे मानसिक संतुलन का खेल में संतुलित रूप से खेलने के लिए एवं अपनी विजय प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है । आपने अपने पिछले अनुभवों के आधार पर कई खिलाड़ियों के साथ किए गए प्रयोगों का वर्णन करते हुए बताया कि इस प्रकार से सकारात्मक चिंतन जिसमें-
1- मेडिटेशन
2- विजुलाइजेशन
3- सकारात्मक एफर्मेशन
4- सेल्फ टॉक और
5- साइलेंस
इन पांचों टूल्स का उपयोग करके हम अपने परफॉर्मेंस में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं । आपने ब्रह्मा कुमारीज ग्वालियर का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज के इस अंतरराष्ट्रीय टग ऑफ वॉर डे पर इस प्रकार का आयोजन किया । अपने कहा कि हमारी आदरणीय दादी जी और शशि दीदी जी भी हमारे पीस पार्क हेड क्वार्टर में सभी भाई बहनों को टग ऑफ वार खेल खिलाते हैं ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एम पी व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कैप्टन श्री कबीर सिंह भदोरिया ने अपने अनुभवों को व्यक्त करते हुए कहा कि एक समय ऐसा होता था जबकि पैरा स्पोर्ट्स इतने प्रचलित नहीं थे परंतु आज के समय पर सरकारें इस ओर ध्यान दे रही है जिस वजह से कई भाई बहने बहुत इस ओर अग्रसर हो रहे हैं और अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं । तो हमें इन स्पोर्ट्स को अपने जीवन में धारण करते हुए उमंग उत्साह के साथ अपने परफॉर्मेंस अच्छे से अच्छा करने का लक्ष्य में जीवन में रखना है । अपने माइंड और बॉडी को फिट रखने के लिए स्पोर्ट्स बहुत जरूरी है ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्मी ऑफिसर कर्नल डॉ. अरविंद झा जी ने कहा कि सकारात्मक चिंतन का और राजयोग का बहुत ही सकारात्मक प्रभाव हमारे खेल के परिणामों पर पड़ता है इसके अभ्यास से हम मनचाहे परिणाम अपने खेल के परफॉर्मेंस में प्राप्त कर सकते हैं । आपने कहा कि जगबीर भाई जी के साथ कई ओलंपिक्स में आपने खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक चिंतन की ट्रेनिंग दी है और आप इसके सकारात्मक प्रभावों से भलीभांति परिचित हैं । आपने अपनी सेवाएं भविष्य में भी संस्थान को प्रदान करने के लिए कहा कि खिलाड़ियों के लिए जिस भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता हो वह हमेशा इस बारे में तत्पर है ।
इसके पश्चात संस्थान के युवा भाईयों ने मिलकर रस्साकशी अथवा टग ऑफ़ वॉर का आनंद भी लिया । जिसमें एक टीम फरिश्ता और दूसरी महावीर टीम थी, जिसमें टीम फरिश्ता ने इस खेल को जीतकर आदरणीय दीदी जी से सम्मान भी प्राप्त किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी बी के आदर्श दीदी जी ने कहा कि हमारे जीवन में स्पोर्ट्स चाहे वह किसी भी प्रकार का हो उसका होना अति आवश्यक है, ताकि हम शारीरिक रूप से जागरूक और चुस्त बने । जिसके आधार पर हम अपने कार्यों को और अच्छे से कर पाऐंगे । आपने कहा कि ध्यान एकाग्र करने के लिए भी स्पोर्ट्स का जीवन में होना अति आवश्यक है और इसकी शिक्षाएं विशेष रूप से संस्थान का स्पोर्ट्स प्रभाग बखूबी प्रदान कर रहा है । आपने आह्वान किया स्पोर्ट्स से जुड़े भाई बहनों का जो कि इस सकारात्मक चिंतन के इस विशेष शिविर से विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी के डॉ गुरचरन सिंह ने कहा कि हमें विशेष रूप से पांच बातों का ध्यान रखना चाहिए-
1- अपने जीवन में और खेलकूद में निरंतर प्रगति को प्राप्त करने के लिए हमेशा सपोर्ट स्पिरिट यानि कि खेल की भावना को हमेशा बनाए रखना चाहिए ।
2- हर परिस्थिति में सकारात्मक सोचना चाहिए, विपरीत परिस्थितियां भी ज्यादा से ज्यादा क्या कर सकती है और अगर हम पॉजिटिव सोचते हैं तो हम क्या कुछ कर सकते हैं
3- हमेशा स्वदर्शन करना है अर्थात अपनी जहां कमी कमजोरियों को चेक करते हुए उनको निकालने का प्रयास करना है साथ-साथ अपनी शक्तियों को बढ़ाने का भी प्रयास निरंतर जारी रखना है ।
4- हर परिस्थिति को साक्षी होकर देखना है साक्षी माना न्यारे हो कर ।जब हम न्यारे होते हैं तो हर परिस्थिति में हमारी निर्णय शक्ति बढ़ जाती है । इसीलिए खेल में निर्णय करने के लिए रेफरी या एम्पायरस की आवश्यकता होती है ।
5- अंत में सकारात्मक रूप से अपने जीवन को चलाने के लिए अपनी सारी जिम्मेदारियों का बोझ पिता परमात्मा को दे देना है अर्थात उनको समर्पित कर देना है । समर्पण भाव से बड़े से बड़े कार्य सहज रूप से हो सकते हैं ।
आपने कहा कि इस प्रकार से खेलकूद करने से हमारे अंदर हैप्पी हारमोंस का भी निर्माण होता है जिसकी वजह से हम हमेशा खुशी उमंग उत्साह में रह सकते हैं ।
अंत में सभी भाई बहनों का धन्यवाद करते हुए बी के प्रहलाद भाई ने कहा कि यह विशेष आयोजन इस चीज को ध्यान में रखते हुए किया गया है कि हम अपने जीवन में आने वाली परिस्थितियों और खेलकूद में आने वाली विपरीत परिस्थितियों का सहजता से सामना कर सकें । कार्यक्रम का लाइव प्रसारण ब्रह्माकुमारीज़ ग्वालियर के यूट्यूब चैनल पर भी किया गया ।
Programme Link :
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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है। कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं…
नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई
जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर
क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी
ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है।
कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है।
ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं या नशे का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नशा उनके दुख, तनाव और परेशानियों को कम कर देगा, लेकिन वास्तव में नशा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा बना देता है। हमें यह समझना होगा कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हमारे साथ हमारा परिवार भी जुड़ा हुआ है। माता-पिता की उम्मीदें, बच्चों का भविष्य, जीवनसाथी का विश्वास। जब एक व्यक्ति नशे की लत में पड़ता है, तो केवल वही नहीं टूटता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटने लगता है। इसलिए हमें अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी शक्ति दी है, वह है सोचने और समझने की क्षमता। यह क्षमता किसी और प्राणी में नहीं है। यदि समझ होते हुए भी हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो वह हमारी कमजोरी है, न कि मजबूरी। जब हम अपनी समझ का सही उपयोग करते हैं, तभी हम नशे जैसी बुराइयों से खुद को और अपने समाज को बचा सकते हैं।
डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर नशा नहीं करेंगे तो मन नहीं लगेगा, दिमाग शांत नहीं रहेगा, काम में ध्यान नहीं आएगा। लेकिन यह केवल एक भ्रम है, सच्चाई नहीं। नशा मन को स्थिर नहीं करता, बल्कि उसे और बेचैन बना देता है। कुछ समय के लिए यह दर्द को दबा देता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को खोखला कर देता है।
वर्तमान में अनेक प्रकार से नशा हमारे समाज में पांव फैलाता जा रहा है जिनके द्वारा आपके शरीर को आपके दिमाग को नुकसान होता है आपके व्यवहार में भी बदलाव आता है। एडिक्शन की वजह से लीवर खराब हो सकता है। किडनी, पेनक्रियाज, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां या फिर हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना ही बेहतर है यदि आप नशे के शिकार है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसे छोड़ सकते है
शिविर का समापन नशा मुक्त, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।



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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
यह सम्मान पूर्व विधायक श्री मुन्नालाल गोयल, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री मान. श्री तुलसी सिलाबट, बीजेपी जिलाध्यक्ष अध्यक्ष जय प्रकाश राजोरिया, अनेकानेक धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में बीके प्रहलाद भाई नें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकश ड़ालते हुए उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को सुन्दर बनाने कि बात कही तो वहीं अन्य अतिथियों नें भी इस विषय पर प्रकश डाला।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के भाई एवं बहनें हुए शामिल
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शासकीय उ.मा.वि. शिक्षानगर में सामुहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से बीके प्रहलाद भाई, बीके अंजलि बहन, बीके योगेश भाई सहित अन्य भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका सिंह घुरैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, जिला पंचायत सीईओ श्री सोजान सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, स्कूल के विद्यार्थी, पतंजलि संस्थान के सदस्य आदि शामिल रहे।






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सकारात्मक चिंतन से हर समस्या का समाधान मिलता है – आदर्श दीदी (न्यूज़ कवरेज)







