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ग्वालियर हेलीपेड कॉलोनी में त्रिदिवसीय राजयोग शिविर संपन्न

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ग्वालियर:  श्री हनुमानजी मंदिर पार्क हेलीपेड कॉलोनी में त्रिदिवसीय राजयोग शिविर संपन्न|

जैसा कि हम सभी वर्तमान समय देख रहे हैं कि इतनी भागती – दौड़ती व्यस्त जीवनशैली में किसी भी उम्र के लोग अनावश्यक ही किसी भी समय डिप्रेशन, अनिंद्रा, भय का शिकार हो जाते हैं | इस त्रिदिवसीय शिविर में आप सीखेंगे उस सर्वशक्तिमान परमात्मा से कनेक्ट होने वाले “राजयोग मैडिटेशन” को और साथ ही मुक्त होंगे व्यर्थ के तनाव, चिंता, भय और परेशानियों से और अनुभव करेंगे अपने जीवन में एक विशेष परिवर्तन | उक्त बातें आज ब्रह्माकुमारीज संस्थान से पधारे राजयोगी बी.के. प्रह्लाद भाई जी ने कहीं इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में विशेष है, शक्तिशाली है, उसके अन्दर असीम शक्ति है| लेकिन हम यह भूल चुके हैं कि हम सर्वशक्तिमान परमात्मा की संतान हैं और भूलने के कारण ही हम दु:खी हो जाते हैं और अनावश्यक ही दुःख, चिंता परेशानियों में घिर जाते हैं क्यों कि दुनियां में हमारा सबके साथ बहुत अच्छा कनेक्शन है लेकिन एक कनेक्शन टूटा हुआ है वो भी इस संसार के डायरेक्टर के साथ, कनेक्शन हमारा पक्का नहीं है इसलिए आज से जीवन में खुश रहने के लिए, तनावमुक्त और सकारात्मक रहने के लिए एक चीज को जानकर पक्का कर लें कि मेरा इस स्रष्टि के सृजनहार से क्या कनेक्शन है उससे अपना कनेक्शन जोड़ लें क्यों कि यह स्रष्टि एक रंगमंच है और इस पर हम सभी अभिनय कर रहे हैं | हर एक का अभिनय अपना–अपना है लेकिन हम दूसरों के अभिनय को देखकर प्रभावित हो जाते हैं | और टेंशन में आ जाते हैं कि उसको मेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था | लेकिन हर कोई अपने –अपने पार्ट को एक्यूरेट प्ले कर रहा है | यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो तीन चीजों की जानकारी होना आवश्यक है :”मै कौन हूँ ?“ “मुझे किसने यहाँ भेजा है इस खेल का डायरेक्टर कौन है?”, और “यह खेल क्या है?” दुनियाँ में सभी एक्टर्स के साथ अच्छा कनेक्शन होना जरुरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी है उस डायरेक्टर के साथ कनेक्शन, जो भी व्यक्ति उसके साथ कनेक्शन रखता है उसको दुनियां में कोई भी ताकत हरा नहीं सकती | इसका एक उदहारण महाभारत में मिलता है कि कौरवो के पास अक्षोंहिणी सेना थी फिर भी हार गए जबकि पांडवों के पास अक्षोंहिणी सेना नहीं थी लेकिन भगवान का साथ था उसमें भी भगवान ने अस्त्र शस्त्र नहीं उठाये बल्कि अर्जुन को केवल गाईड किया था उस आधार पर ही पांडवो की विजय हुई ठीक उसी प्रकार भगवान को हम अपने साथ रखते है तो हमारी हर कार्य में विजय निश्चित है | इसी स्मृति के साथ जीवन में खुश रहने के लिए, शांत रहने के लिए हमें अपने चिंतन को श्रेष्ठ बनाना होगा उसके लिए थोडा समय हम मैडिटेशन के लिए निकालें |

बी. के. प्रह्लाद भाई ने शिविर के दूसरे दिन सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आज मनुष्य के पास ज्ञान सुनने का या मैडिटेशन करने का समय नहीं है लोग ऐसा मानते है कि 60 वर्ष के बाद यह सब करना चाहिए पर वास्तव में ज्ञान सुनने के लिए उम्र नहीं होती | वल्कि जब जिस घडी से ज्ञान मिले उसी क्षण से ज्ञान को जीवन में धारण करने की आवश्यकता है जैसे शरीर को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती उसी तरह से जीवन को सही रीति से जीने के लिए सत्य ज्ञान की आवश्यकता है|

यदि ऐसा मान लें कि कलियुग में मनुष्य की ओसतन आयु 60 वर्ष है तो उसके हिसाब से

(1)    5 वर्ष उसके वचपन में,

(2)    6 वर्ष शिक्षा में,

(3)    6.5 वर्ष खेलकूंद में,

(4)    14 वर्ष नौकरी में या व्यवसाय में(10 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से),

(5)    18 वर्ष सोने में(8 घंटे प्रत्दीन के हिसाब से),

(6)    4.5 वर्ष नहाना/धोना/भोजन इत्यादि में,

(7)    4 वर्ष शोपिंग/विश्राम में

जीवन के 58 वर्ष तो ऐसे ही निकल गए अब सिर्फ 2 वर्ष बचते है वह इन 2 वर्षों में क्या कर सकता है| इसलिए जैसे इन सभी कार्यो के लिए समय फिक्स है वैसे ही थोडा समय मैडिटेशन/ध्यान के लिए फिक्स करना चाहिए जिससे मन शांत रहेगा| जीवन में खुशियाँ रहेंगी | और अपने जीवन का सही आनंद ले सकेगे |

इसके साथ ही राजयोग मैडिटेशन के बारे में बताते हुए कहा कि राजयोग एक बहुत ही सरल और सहज प्रक्रिया है जिसमें हम अपने मन के द्वारा चिंतन करते है और उसी चिंतन को बुद्धि के द्वारा मानस पटल पर चित्रित करते है ऐसा करने पर हम अपने मन और बुद्धि को एकाग्र कर सकते है | ऐसा करने पर सहज ही हम अपने मन को ईश्वर से जोड़ लेते है उसकी शक्तियां मुझे मिलने लगती है | और उसकी याद से हम अपने हर कार्य को सफलता पूर्वक कर सकते है | और जब हम राजयोग का नित्य प्रितिदीन अभ्यास करते है तो हमारे जीवन में अष्ठ शक्तियां आ जाती है | जो हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है | और अष्ट शक्तियों के बारे में सभी को विस्तार से बताया| इसके तत्पश्चात कमेंटरी के माध्यम से सभी को राजयोग मैडिटेशन की गहन अनुभूति भी कराई |

शिविर के तीसरे दिन ग्वालियर सेवाकेंद्र संचालिका राजयोगिनी बीके आदर्श दीदीजी, सीनियर राजयोग टीचर बीके डॉ गुरुचरण भाई औरमोटिवेशनल स्पीकर बीके प्रह्लाद भाई उपस्थित थे| बी.के. डॉ. गुरुचरण भाई ने कहा कि हम सभी उस सर्वशक्तिमान पिता परमात्मा दाता कि संताने हैं तो हमें सर्व के प्रति सहयोग, स्नेह, सम्मान कि भावना रखनी है चाहे कोई मुझे सहयोग दे या न दे लेकिन मुझे देना है, कोई स्नेह दे या न दे मुझे सर्व के प्रति स्नेह कि भावना रखनी है क्यों कि में उस दाता का बच्चा हूँ| इस बात को पक्का कर लें तो तनाव आपके आसपास आ भी नहीं सकता ” जिसका साथी हो भगवान् उसको क्या रोकेगा आंधी और तूफ़ान”| और सभी को अंडरलाइन करवाया कि हम सभी विशेष हैं तो हमारी सोच भी साधारण नहीं होनी चाहिए, यदि कोई भी संकल्प  ऐ-वैसा आये तो सदैव स्मृति रहे कि में उस परमात्मा सर्वोच्च सत्ता कि संतान हूँ तो मेरे संकल्प,विचार भी श्रेष्ठ होने चाहिए|

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है। कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं…

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई
जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर
क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी

ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है।
कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है।
ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं या नशे का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नशा उनके दुख, तनाव और परेशानियों को कम कर देगा, लेकिन वास्तव में नशा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा बना देता है। हमें यह समझना होगा कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हमारे साथ हमारा परिवार भी जुड़ा हुआ है। माता-पिता की उम्मीदें, बच्चों का भविष्य, जीवनसाथी का विश्वास। जब एक व्यक्ति नशे की लत में पड़ता है, तो केवल वही नहीं टूटता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटने लगता है। इसलिए हमें अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी शक्ति दी है, वह है सोचने और समझने की क्षमता। यह क्षमता किसी और प्राणी में नहीं है। यदि समझ होते हुए भी हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो वह हमारी कमजोरी है, न कि मजबूरी। जब हम अपनी समझ का सही उपयोग करते हैं, तभी हम नशे जैसी बुराइयों से खुद को और अपने समाज को बचा सकते हैं।
डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर नशा नहीं करेंगे तो मन नहीं लगेगा, दिमाग शांत नहीं रहेगा, काम में ध्यान नहीं आएगा। लेकिन यह केवल एक भ्रम है, सच्चाई नहीं। नशा मन को स्थिर नहीं करता, बल्कि उसे और बेचैन बना देता है। कुछ समय के लिए यह दर्द को दबा देता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को खोखला कर देता है।
वर्तमान में अनेक प्रकार से नशा हमारे समाज में पांव फैलाता जा रहा है जिनके द्वारा आपके शरीर को आपके दिमाग को नुकसान होता है आपके व्यवहार में भी बदलाव आता है। एडिक्शन की वजह से लीवर खराब हो सकता है। किडनी, पेनक्रियाज, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां या फिर हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना ही बेहतर है यदि आप नशे के शिकार है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसे छोड़ सकते है
शिविर का समापन नशा मुक्त, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
यह सम्मान पूर्व विधायक श्री मुन्नालाल गोयल, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री मान. श्री तुलसी सिलाबट, बीजेपी जिलाध्यक्ष अध्यक्ष जय प्रकाश राजोरिया, अनेकानेक धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में बीके प्रहलाद भाई नें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकश ड़ालते हुए उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को सुन्दर बनाने कि बात कही तो वहीं अन्य अतिथियों नें भी इस विषय पर प्रकश डाला।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के भाई एवं बहनें हुए शामिल

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शासकीय उ.मा.वि. शिक्षानगर में सामुहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से बीके प्रहलाद भाई, बीके अंजलि बहन, बीके योगेश भाई सहित अन्य भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका सिंह घुरैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, जिला पंचायत सीईओ श्री सोजान सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, स्कूल के विद्यार्थी, पतंजलि संस्थान के सदस्य आदि शामिल रहे।

 

 

 

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