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आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर दया एवं करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण 4 दिवसीय मैडिटेशन शिविर का शुभारंभ (30.04.2022)

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आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर दया एवं करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण 4 दिवसीय मैडिटेशन शिविर का शुभारंभ –

लश्कर ग्वालियर : आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर, “दया एवं करुणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण”  4 दिवसीय ध्यान-मैडिटेशन शिविर का शुभारंभ आज 30 अप्रेल, 2022 को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय “प्रभु उपहार भवनमाधौगंज स्थित सेवाकेंद्र पर किया गया । इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के भीनमाल (राजस्थान) सेवाकेंद्र की प्रमुख, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका बी. के. गीता दीदी जी विशेष रूप से पधारे तथा अगले चार दिनों तक आपके द्वारा ही यह कार्यक्रम सम्पन्न किया जायेगा ।

4 दिवसीय ध्यान-मैडिटेशन शिविर का शुभारंभ कार्यक्रम में विशेष रूप से आदरणीय संत श्री कृपाल सिंह जी महाराज (आध्यात्म निकेतन), बी. के. गीता दीदी जी, (वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका) भीनमाल राजस्थान, श्रीमती समीक्षा गुप्ता जी (पूर्व महापौर),  बी.के. आदर्श दीदी (स्थानीय सेवाकेंद्र प्रमुख), डॉ. बी.के. गुरचरण जी (राजयोग प्रशिक्षक), बी.के. प्रहलाद (राजयोग प्रशिक्षक) एवं अन्य द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

4 दिवसीय शिविर के उद्देश्य के विषय में बताते हुए डॉ. बी.के. गुरचरण जी ने कहा:  वर्तमान समय में मानव जीवन एक कठिन दौर से गुजर रहा है । आज सारे विश्व में अशांति व भय का वातावरण है । निर्धन हो या धनवान सभी अपनी अपनी रीति से परेशान है । जिन मनुष्यों के पास धन है, साधन है, वे भी सच्ची शांति से वंचित है। कहीं विश्व में शक्ति प्रदर्शन का प्रभाव है, राजनैतिक प्रभाव है या आर्थिक कारण, कहीं प्राकृतिक आपदायें है, कही धार्मिक वैमनस्यता का प्रभाव है, कहीं कोई महामारी अपना प्रभाव दिखा रही है, हर तरफ असंतोष, नीरसता दिखाई देती है । इस प्रकार के वातावरण में सभी स्थाई सुख- शांति की तलाश कर रहे है । देखा जाए तो इन सबका कारण मानव जीवन में पांच मनोविकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह और अभिमान द्वारा उत्पन्न हुआ नैतिक पतन है । इन मनो विकारों की उत्पत्ति आतंरिक शक्ति की कमी अथवा आध्यात्मिक कमजोरी से होती है । राजनैतिक सशक्तिकरण, आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा एवं विज्ञान द्वारा सशक्तिकरण, महिलाओं का सशक्तिकरण आदि अनेकों कोशिशों के बाद भी हिंसा, अपराध, अन्याय, भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ता ही जा रहा हैं । क्योकि इन सब प्रयासों के बाद भी मानव जीवन में श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण व उत्थान नहीं हो सका । जब तक मानव जीवन में शुभ-भावना व श्रेष्ठ कामना का अभाव है तब तक कर्मों में दिव्यता नहीं आ सकती ।

गीता दीदी जी ने कहा :  स्वर्णिम युग एक ऐसा समय था जबकि विश्व में सम्पूर्ण सुख शांति का साम्राज्य था । और यह श्रृष्टि फूलों का बगीचा कहलाती थी । प्रकृति भी सतोप्रधान थी और किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं नहीं थी । सभी मनुष्य सतोप्रधान एवं दैवीय गुणों से सम्पन्न थे। सर्व के मनोभावों में महानता थी । तब उस समय यह संसार स्वर्ग कहलाता था । ऐसे स्वर्ग काल में समृद्धि, सुख और शांति का मुख्य कारण उस समय के सभी मनुष्य जिन्हें देवता कहा जाता है, वे मन, वचन, कर्म से सम्पूर्ण पवित्र थे । उस स्वर्णिम संसार की तुलना में आज का मनुष्य विकारी, दुखी व अशांत बन गया हैं । हर एक मानव के मनोभावों का स्तर अत्यंत ही दयनीय स्थिति में है । हर मानव में काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, अभिमान, झूठ, शक्ति व आर्थिक सम्पन्नता का प्रदर्शन करने की प्रतिस्पर्धा जैसे दूषित मनोविकृतियों विद्यमान है । जिनके कारण हर मानव के भीतर से मानवीय संस्कारों का हनन हो गया है । जिसका प्रभाव हम वर्तमान समय अपने चारों और देख रहे है । आज हर मानव अपनी अपनी समस्याओं से त्रस्त होकर ईश्वर से शांति और सुख सम्पन्न संसार की प्रार्थना व कामना करते है ।

अब ऐसे स्वर्णिम समय को फिर से धरा पर साकार करने के लिए मानव का आध्यात्मिक सशक्तिकरण ही सबसे उत्तम उपाय है । मन के विचार ही मानव जीवन में संस्कारों का निर्माण करते है । मन में उत्पन्न होने वाले विचारों के आधार पर ही मानव कर्म करता है तथा कर्म के आधार पर ही मनुष्य को सुख और दुःख की प्राप्ति होती है । आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा मन के व्यर्थ विचारों व मनोविकृतियों को नियंत्रित कर व आध्यात्मिक ज्ञान का चिंतन, मनन करने से मन व बुद्धि का दिव्यीकरण होता है । साथ ही राजयोग मैडिटेशन वह विधि है जिसके माध्यम से मनुष्यात्मा का सम्बन्ध सर्वशक्तिमान, पतित-पावन, परलौकिक परमपिता परमात्मा शिव के साथ जुड़ता हैं जिससे उसे विकारो पर विजय प्राप्त करने का मनोबल प्राप्त होता है । जब मानव जीवन अपने पूर्व के विकार्मो के बोझ अथ्वा कर्मों के हिसाब किताब से मुक्त होता है तब स्वत: ही वह जीवन में हल्का पन अनुभव करता है । इसी प्रकार दिव्य गुणों की धारणा ही मनुष्य को जीवन में सुख शांति का अनुभव कराती है । जीवन में मानवीय मूल्यों- प्रेम, सन्तोष, गंभीरता, विनम्रता, सहनशीलता, आदि की धारणा तथा आदरयुक्त दिव्य व्यवहार ही मनुष्य को सर्व का प्रिय बनाता है । इस प्रकार मनुष्यात्मा आध्यात्मिक ज्ञान व राजयोग मैडिटेशन के नियमित अभ्यास द्वारा आध्यात्मिक सशक्तिकरण कर परमात्मा से सुख, शांतिमय जीवन का अपना जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त कर सकती हैं।

 बी. के. आदर्श दीदी जी ने कहा: आज मानव समाज को आध्यात्मिक सशक्तिकरण की आवश्यकता है । आध्यात्मिक सशक्तिकरण का अर्थ है अपने अन्दर के विकारों का उन्मूलन करना और आत्मा को अपने आदि-अनादि गुणोंव शक्तियों में वापस ले जाना। जब तक मनुष्य नहीं बदलेगा तब तक समाज भी नहीं बदल सकता। समाज व विश्व की व्यवस्था में परिवर्तन कर सुखदायी स्थिति का निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम मनुष्य को स्वयं को बदलना पड़ेगा। तभी स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन आएगा। कई लोग आध्यात्मिकता और धर्म में अंतर नहीं जानते । आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा के मौलिक गुणों शांति, प्रेम, आनंद, पवित्रता और शक्तियों को बढाना तथा सर्व को एक परमपिता परमात्मा की संतान समझकर कर्म-सम्बन्ध में आना।

  आदरणीय संत श्री करपाल सिंह जी महाराज ने कार्यक्रम के प्रति अपनी शुभकामनाये देते हुए कहा: आध्यात्मिक सशक्तिकरण के बिना स्वर्ग या राम राज्य केवल कल्पना ही है। उसे वास्तविकता में परिणित नहीं किया जा सकता। आध्यत्मिकता द्वारा ही मानव जीवन में मूल्यों का पुनर्वास होगा । जिससे ही यह समाज सुखमय बन सकेगा।

श्रीमती समीक्षा गुप्ता जी ने कहा: वर्तमान विषम परिस्थितियों में जहाँ चारो और भय और अशांति का वातावरण है। वहां आध्यात्मिक ज्ञान की धारणा द्वारा व आत्मा चिंतन से आत्म परिवर्तन करना आवश्यक है । मुझे आपार प्रसन्नता है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आध्यात्मिक शक्तियों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी । जिससे व्यक्तित्व में दिव्यता आयेगी ।

भ्राता राजीव गुप्ता जी :  कार्यक्रम के लिए आयोजकों का धन्यवाद करते हुए श्रेष्ठ समाज के निर्माण में संस्थान के प्रयासों की सराहना की । मैडिटेशन का नियमित अभ्यास मन को शांति और शक्ति का अनुभव करता हैं।

अंत में बी.के. प्रहलाद के द्वारा आये हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम को सम्पन्न किया गया ।

News Link : https://sandhyadesh.com/full_news.php?newsid=8220

https://www.aapkedwar.page/2022/05/blog-post.html?m=1

 

 

 

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

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संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी

“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश

सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल

ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।

ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

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योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी

“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश

सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल

ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।

ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।

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