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आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर अभियान की धूम(14.02.2022)
आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर अभियान की धूम
ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ग्वालियर की स्थानीय शाखा के द्वारा आज 3 दिनों को सम्मुख रखते हुए 3 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । सर्वप्रथम एम्पलाई लीगल अवेयरनेस डे के उपलक्ष्य में ओल्ड हाई कोर्ट स्थित स्थानीय सेवा केंद्र पर एक जन जागृति का कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें मुख्य रुप से एडवोकेट लेबर बार एसोसिएशन ग्वालियर के अध्यक्ष श्री भगवान सिंह बैंस जी ने मुख्य रूप से और एडवोकेट अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया । संस्थान की भगिनी संस्था राजयोगा एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के न्यायविद प्रभाग द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसमें कर्मचारियों की जागृति हेतु विशेष टिप्स बताए गए जिसके आधार पर वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर अपने कार्यों को सुचारु रुप से कर सकें । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भगवान सिंह जी ने कहा कि कर्मचारियों का और अधिकारियों का रिश्ता तो पुराने समय से चला आ रहा है । पुराने समय पर जहां अधिकारी लोग कर्मचारियों को अपने कार्यों के लिए उनका शोषण किया करते थे यहां तक की ताजमहल बनाने वालों के तो उनके हाथ काट दिए थे । जिसके परिणाम स्वरुप वह भविष्य में कार्य करने के काबिल ना रह सके । परंतु वर्तमान समय सरकारें इस ओर विशेष रुप से ध्यान देते हुए इस प्रकार के कानून नए-नए ला रही है जिस आधार पर कर्मचारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है तथा उनकी मांग कर सकता है । सिर्फ आवश्यकता है इसके लिए जागृति की, हम जागृत रहकर जहां अपने अधिकारों के लिए अपनी बात रख सकें, वही साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी विधिवत रूप से पालन कर सकें । आपने कहा कि मुझे खुशी है कि संस्थान ने इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजन करके उन्हें आमंत्रित कर इस विशेष सेवा का अवसर प्रदान किया । आपने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार के परामर्श के लिए सदैव सेवा में तत्पर रहेंगे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एडवोकेट अनिरुद्ध जी ने कहा की विभिन्न लेबर लॉज में इस प्रकार का जिक्र है- एक कर्मचारी से कितना समय कार्य कराया जा सकता है, किस विधि से कराया जा सकता है, मिनिमम वेजेस कितने होंगे और गर्भवती महिलाओं के कार्य संबंधी दिशा निर्देश भी इन लॉज में बताए गए हैं, जिसकी सम्पूर्ण जानकारी होना अति आवश्यक है । आपने कहा कि आज के समय पर हम किसी का शोषण ना करते हुए विधि विधान के अनुसार उनसे अगर कार्य कराएं तो हम होने वाली कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी के डॉ गुरचरण सिंह ने कहा कि जिस प्रकार से हमारे भारत का संविधान जहां एक ओर कर्मचारियों की सुरक्षा एवं उनके मौलिक अधिकारों साथ साथ उनकी जिम्मेदारियों के प्रति हमें दिशा निर्देश देता है, उसी प्रकार से वर्तमान समय ईश्वरीय संविधान जिसके अनुसार स्वयं पिता परमात्मा सच्ची सरकार इस धरा पर अवतरित होकर हम सभी मनुष्य आत्माओं को, जिनका शोषण अनेक समय से विकार कर रहे हैं । उन्हें इस प्रकार के शोषण से मुक्त कराने के लिए विधि विधान बनाकर हमें इस प्रकार के दिशा निर्देश वर्तमान समय प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से दे रहे हैं । आवश्यकता है कि हम जागरूक रहें जिसके आधार पर हम अपनी बुराइयों से मुक्त होकर, अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहकर, अपनी कमी कमजोरियों से मुक्त बन सकें । साथ-साथ अपने विश्व कल्याण के जिम्मेवारी के प्रति भी जागरूकता अति आवश्यक है जिसका हमें बखूबी निर्वहन करना है । वर्तमान समय पिता परमात्मा हमें विश्व कल्याण की जिम्मेवारी का ताज भी दे रहे हैं तो जहां हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आवश्यक है वहीं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी जरूरी है । अंत में अपनी शुभ आशीष देते हुए स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी ने कहा कि जिस प्रकार से हमारा शोषण हो रहा है इसका मूल कारण है हमारी अज्ञानता है चाहे वह आध्यात्मिक स्तर पर हो या भौतिक स्तर पर हो, इसके लिए हमें जागरुक होने की अति आवश्यकता है । आपने कहा हमें जागरूक और सतर्क रहना है, जहां अपने कार्यों के प्रति, अपनी जिम्मेदारियों के प्रति वहीं अपने अधिकारों के प्रति भी । अन्त में सभी ने परमात्म याद से स्वयं की जागृति से सभी को जागृत करने का प्रण भी किया ।
दूसरा कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में संस्थान के कला एवं संस्कृति प्रभाग के द्वारा स्थानीय सेवा केंद्र माधव गंज स्थित प्रभु उपहार भवन में किया गया । जहां पर हमारे देश की शान माननीया सरोजिनी नायडू जी के योगदानों को याद किया गया तथा भारत रत्न स्वर्गीय लता मंगेशकर जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने हेतु सामूहिक योगाभ्यास का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें सभी भाई बहनों ने संगठित रूप से दोनों विशेष हस्तियों के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए और पिता परमात्मा से शक्तियां लेकर उन्हें प्रदान किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी के डॉ गुरचरन सिंह ने कहा कि जिस प्रकार से इन विशेष आत्माओं ने आज से कई वर्ष पूर्व जबकि महिलाओं को घर की चार दिवारी के अंदर रखा जाता था, वह संघर्ष किया, वह अभ्यास किया जिसकी वजह से आज उनका नाम पूरे विश्व भर में रोशन है तथा भारत का नाम सर्वत्र रोशन किया । हमें भी उनके जीवन से यह शिक्षा अपने जीवन में धारण करनी है कि हमें अनेक प्रकार के बंधनों की बेड़ियों को तोड़कर, अपनी कमी कमजोरियों से मुक्त बनकर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर होना है । इसके लिए जो अभ्यास पिता परमात्मा करा रहे हैं वह सदैव ईमानदारी के साथ करना है । जैसा की लता जी ने संगीत के अभ्यास को इतनी तन्मयता के साथ किया कि जिस वजह से उनके रग रग में संगीत बसा हुआ था, सरोजिनी नायडू जी को भारत कोकिला के रूप में याद किया जाता है । इस प्रकार से हमें भी देवी गुणों की धारणाओं का अभ्यास, पिता परमात्मा की याद का अभ्यास इतना करना है जिससे यह सभी धारणाएं हमारी स्वाभाविक रूप से हो सकें ।
आज का तीसरा कार्यक्रम जो कि वर्ल्ड रेडियो दिवस पर संस्थान के मीडिया प्रभाग के द्वारा आयोजित किया गया । जिसमें विशेष रूप से राष्ट्रीय कलाकार देवी भ्राता जावेद जी ने पिता परमात्मा की याद के भजनों के द्वारा सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । आपने कहा कि संगीत ऐसी विद्या है जिसके आधार पर हम निरंतर पिता परमात्मा से योग लगा सकते हैं । आपने भजनों के माध्यम से पिता परमात्मा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई, साथ-साथ सभी भाई बहनों के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की । रेडियो के महत्व को बताते हुए कहा कि आज बहुत सारे भाई बहनें रेडियो के माध्यम से संगीत से जुड़े हुए हैं । एफएम या और प्रकार के जो चैनल हैं उसके माध्यम से हम यत्र तत्र सर्वत्र संगीत का आनंद ले सकते हैं । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी के डॉ गुरचरन सिंह ने कहा कि वर्तमान समय कई भाई बहनें रेडियो के माध्यम पर विश्वास करते हुए उसके द्वारा दी गई जानकारी को सत्य के रूप में देखते हैं । इसी वजह से इस वर्ष का जो थीम है वह रेडियो और विश्वास अर्थात ट्रस्ट एंड रेडियो है । पिता परमात्मा भी हमें यह शिक्षा दे रहे हैं कि बच्चे निश्चय बुद्धि विजयंती संशय बुद्धि विनश्यन्ति, निश्चय हमारी विजय का आधार है । तो सदैव हमें निश्चय बुद्धि बनकर ही रहना है, सदैव पिता परमात्मा पर निश्चय और उनके द्वारा दिए जा रहे ज्ञान पर निश्चय । जो कम्युनिटी रेडियो मधुबन मुख्यालय से चलाया जा रहा है उसके कार्यक्रमों का भरपूर आनंद हम सभी को लेना है । तो जहां रेडियो से प्राप्त जानकारी के ऊपर विश्वास रखना है साथ साथ हमें अपनी मन बुद्धि के आधार पर हर बात को परख करके उसको स्वीकार करना है, यह बहुत आवश्यक बात है । अंत में अपनी शुभ भावनाएं शुभ कामनाएं व्यक्त करते हुए स्थानीय सेवाकेंद्र प्रभारी बी के आदर्श दीदी जी ने कहा कि संगीत पिता परमात्मा से जुड़ने का और खुश रहने का एक ऐसा माध्यम है जिसके आधार पर हम निरंतर उमंग उत्साह में रह सकते हैं । जिसका उदाहरण हम कलाकारों के जीवन को देख सकते हैं जो सदैव उमंग उत्साह में रहकर अपनी कला में मगन रहते हैं । इसी प्रकार से हमें भी अपनी तपस्या में लीन रहकर सर्व प्रकार की बातों से मुक्त रहना है । अंत में आपने राजयोग का अभ्यास करा कर सभी को पिता परमात्मा की शक्तियों का दिव्य अनुभव कराया ।
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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।
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