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Indraganj Lashkar

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “महिलाओं का सर्वांगीण विकास” विषय पर आयोजित कार्यक्रम (8 मार्च 2019)

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ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, महिला प्रभाग (राजयोग एज्युकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन) माधवगंज लश्कर ग्वालियर के द्वारा आज अंतरर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “महिलाओं का सर्वांगीण विकास” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया | कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्रीमती अनीता जैन (अध्यक्ष, प्रेरणा लोएंस क्लब), श्रीमती ज्योति छाबडिया (रेंजर, वन विभाग) डॉ. कीर्ती धोंडे, ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी (संचालिका ब्रह्माकुमारीज सेंटर), बी.के. ज्योति दीदी (वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका), आशा सिंह (समाज सेविका), बी. के. प्रह्लाद आदि उपस्थित थे| कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया गया एवं कु. रिया ने नृत्य के द्वारा सभी का स्वागत किया | तत्पश्चात बी. के. ज्योति बहन ने संस्थान का परिचय देते हुये पिछले 8 दशक से की जा रही सेवाओं के बारे में बताते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान एक ऐसा संस्थान है जो पूरे विश्व में बहनों के द्वारा संचालित होता है| यह नारी सशक्तिकरण का एक अनूठा उदहारण है |
इसके बाद संस्थान की संचालिका बी.के. आदर्श दीदी ने महिलाओं का सर्वांगीण विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि –
नारी बहुमुखी प्रतिभा की धनी है| वह स्वयंसिद्धा है| नारी के विकास में सर्व का विकास समाया हुआ है| नारी में नर भी आ जाता है और इंग्लिश में woman में man भी आ जाता है तो नारी के विकास में सबका विकास है| इसलिए कहा जाता है की अगर एक नारी को शिक्षित किया तो सारे परिवार को शिक्षित किया, क्यूंकि नारी परिवार की भी धुरी है तो समाज की भी धुरी है तो विश्व की भी धुरी है| नारी का उत्थान विश्व का उत्थान है| नारी के पतन से विश्व का पतन है| यह एक अटल सत्य है और इस सत्य को हम स्वीकार करते हैं और हम नारी हैं तो हमारे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है| स्वयं का विकास कर समाज का विकास करना, देश का और फिर विश्व का करना |
साथ ही उन्होंने बताया कि 6 प्रकार का विकास हो सकता है
1. भौतिक विकास
2. मानसिक विकास
3. बौद्धिक विकास
4. भावनात्मक विकास
5. नैतिक विकास
6. अध्यात्मिक विकास
अगर एक भी कम है तो सर्वांगीण(holistic) नहीं कहेंगे whole में ये सब कुछ आ जाता है, लेकिन आज हम इन सर्व प्रकार के विकास पर ध्यान नहीं देते हैं| एक शरीर की सुन्दरता का भी विकास हम चाहते हैं साथ-साथ धन, मकान ज़मीन, बैंक बैलेंस आदि कई भौतिकों का विकास चाहते हैं| परन्तु यह विकास भी तभी सार्थक है जब अन्य विकास भी हमारे जीवन में है |
मानसिक विकास- का मतलब है हमारे ऊँचे विचार, अगर हमारे अन्दर नकारात्मक विचार है तो हम इस आधुनिक विकासशील युग में भी हम विकासशील अर्थात विकसित नहीं माने जायेंगे| इसलिए मानसिक विकास अगर हम चाहते हैं तो हर वक़्त पॉजिटिव एवं सकारात्मक सोचना होगा| हर पहलू में दो विपरीत बातें आ सकती है अब मुझे किस बात को स्वीकार करना है वह अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर सोच सकते है | उसके लिए हमें अपनी मानसिक शक्ति का विकास करना होगा |
बौद्धिक विकास- बौद्धिक विकास के लिए हमारा IQ ऊँचा होना चाहिए क्यूंकि यदि हमारा IQ ऊँचा होगा हमें समाज का पूरा ज्ञान होगा, हम हर प्रकार से शिक्षित होंगे तो अवश्य ही इस बौद्धिक विकास से हम समाज में ऊँचा स्थान ले सकेंगे| इसलिए बौद्धिक विकास भी आवश्यक है| अतः हमारी सरकार भी यह कहती है कि “बेटी बचाओ-बेटी पढाओ” क्योकि पहले ज़माने में बेटियों को नहीं पढाया जाता था और अभी हम यह जो परिवर्तन देख रहे है यह बहुत अच्छी बात है, इस बदलाव से बेटियाँ भी आगे पढ़कर बहुत कुछ कर सकती हैं| हम देख भी रहें है कि लड़कों से लड़कियां इतने अच्छे नंबर ले लेती है तो ये उनके बौद्धिक विकास का ही प्रमाण है| बौद्धिक विकास होने से नारी का केवल विकास नहीं है बल्कि इस पूरे समाज का ही विकास है|
भावनात्मक विकास के बारे में बताते हुए कहा कि कई बार देखा जाता है की महिलाएं कमज़ोर पड़ जाती हैं और जहा भावनात्मक बात आती है तो नारी जल्दी पिघल जाती है तो वास्तव में हमें इससे भी मजबूत बनना चाहिए शारीरक रीति से मजबूती के लिए लडकियां कराटे एवं अन्य खेल में रूचि रखती हैं जिससे उनकी मसल पॉवर स्ट्रोंग हो लेकिन भावनात्मक विकास भी हमारा उतना ही श्रेष्ठ हो क्यूंकि कई परिस्थितियाँ हमारे सामने आती हैं और यदि हम भावुक होते हैं तो हम उनका सामना नहीं कर सकते इसलिए न ज्यादा भावुक बनें न ज्यादा कठोर बने परन्तु एक सुन्दर समन्वय, स्ट्रोंग भी बनना है, फ्लेक्सिबल भी बनना है| इसलिए बुद्धिमत्ता यही है हम हर परिस्थिति का सामना भी करे डरे भी नहीं, क्यूंकि नारी देवी का स्वरुप है| छुईमुई के पेड़ के समान कोमल इतना भी न बने की हाथ लगाने पर मुरझा कर झुक जाए| दबी हुई भावनाओं का प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ता है क्यूंकि अन्दर दबाए रखा तो तनाव होगा तो इससे हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है इसके लिए भावनात्मक रीति से अपने को बहुत मजबूत बनाना चाहिए |
नैतिक विकास के बारे में बताया कि कि हमारे जीवन में मूल्यों का विकास बहुत जरुरी है| यह नहीं की हम नैतिक मूल्यों को दरकिनार कर विकास के लिए जाएँ| आज दुनिया में हम देख रहे हैं कि लोग अपने मूल्यों को बेच कर धन कमाने में लगे हुए है| झूठ, छल, कपट, निन्दा आदि तरीके अपनाते हैं केवल धन कमाने के लिए अपने मूल्यों का ह्रास करते जा रहे हैं पर वो ये भूल जाते हैं की अगर हमने मूल्यों का ह्रास किया, सत्यता के मार्ग पर नहीं चले तो एक दिन ये झूठ खुल जाएगा| सत्य की नीव हिल सकती है लेकिन डूब नहीं सकती| अगर सचमुच नैतिक मूल्य है तो वो कभी भी हार नहीं खा सकता है | कभी भी उसका विकास न हो यह हो ही नहीं सकता क्यूंकि नैतिक मूल्य मनुष्य को बहुत आगे ले जा सकता हैं|
आध्यात्मिक विकास विकास तो बहुत ही ऊँचा है मानो हर पल हम यह महसूस करते हैं की हम परमात्मा की छत्रछाया में हैं| परमात्मा का हाथ हमारे सिर पर है| इसलिए किसी ने बहुत सुन्दर कहा है की ‘जाको राखे साईयां मार सके न कोए’| अगर भगवान् का साथ है तो मुझे कोई कुछ नहीं कर सकता| मनुष्य का हिसाब तब तक है जब तक हमारे कर्मो के हिसाब किताब है| जन्म जन्म का साथी तो केवल एक भगवान् ही है वो केवल एक परमात्मा है| जब मनुष्य परमात्मा को अपना साथी बनाएगा तो दुनिया की कोई भी परिस्थिति उसे रोक नहीं सकेंगे|
इस अवसर पर श्रीमती अनीता जैन ने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार में संतुलन बनाकर हमें आगे बढ़ना है | एवं श्रीमती ज्योति छाबडिया ने भी इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की |
कार्यक्रम के दौरान कु. रिया और कु. शक्ति के द्वारा नारी सशक्तिकरण पर बहुत सुन्दर मंचन भी किया गया | मंच संचालन बी. के. आशा सिंह ने किया एवं कार्यक्रम के अंत में आभार बी के प्रह्लाद भाई द्वारा किया गया |

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है। कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है। ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं…

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नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है – बीके प्रहलाद भाई
जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है – उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर
क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है – बीके आदर्श दीदी

ग्वालियर। 30/01/2026, पुलिस महानिरीक्षक, विसबल ग्वालियर रेंज, ग्वालियर के निर्देशन में आज 02 री वाहिनी विसबल, ग्वालियर में रेंज स्तरीय नशा मुक्ति शिविर का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
शिविर में 02 री, 13 बी एवं 14 बी वाहिनी विसबल, ग्वालियर के कुल 250 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नशा उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक सशक्तिकरण करना तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं कर्तव्यनिष्ठ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उप महानिरीक्षक /सेनानी राकेश सगर, ब्रह्माकुमारीज संस्थान से केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी, प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई, बटालियन से यूनिट चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश वर्मा, एडजुटेंट पूनम शर्मा उपस्थित थीं। वक्ताओं द्वारा नशा मुक्ति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए आत्मचिंतन, ध्यान एवं नैतिक अनुशासन को अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि नशा इंसान के जीवन को धीरे-धीरे अंधकार की ओर ले जाता है। शुरुआत में यह व्यक्ति को सुकून का एहसास देता है, लेकिन समय के साथ यही नशा शरीर, मन और परिवार को खोखला कर देता है। नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति छीन लेती है और वह अपने कर्तव्यों से दूर हो जाता है। अनेक परिवार इस कारण टूट जाते हैं और समाज कमजोर बनता है। हमें यह समझना होगा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि समस्याओं की जड़ है। यदि हम सच में खुशहाल और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो नशे से दूरी बनाना ही एकमात्र सही मार्ग है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुशी की तलाश में है। हम सोचते हैं कि धन, पद और सुविधाओं से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि खुशी हमारे भीतर होती है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढना, दूसरों की मदद करना और मुस्कुराते रहना ही वास्तविक खुशी है। जब हम दूसरों को खुश करते हैं, तो हमारी खुशी अपने आप बढ़ जाती है। जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है। कोई भी व्यक्ति समस्याओं से बचकर आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तव में समस्याएँ हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। इसलिए उनसे घबराना नहीं चाहिए। क्रोध भी मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को जीत लेता है, वही सच्चे अर्थों में सफल और महान बनता है।
कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक / सेनानी राकेश सागर ने कहा कि याद रखिए, जीत एक दिन मिलती है, लेकिन तजुर्बा रोज़ मिलता है। जीवन में हर दिन जीत नहीं होती, पर हर दिन हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। कभी हालात हमें आगे बढ़ाते हैं, तो कभी गिराकर समझाते हैं। जो व्यक्ति केवल जीत की प्रतीक्षा करता है, वह निराश हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति रोज़ मिलने वाले तजुर्बे को स्वीकार कर लेता है, वही भीतर से मजबूत बनता है। तजुर्बा हमें धैर्य सिखाता है, सही निर्णय लेना सिखाता है और जीवन को समझदारी से जीना सिखाता है। जब इंसान रोज़ खुद पर काम करता है, तभी वह भीतर से विकसित होता है। जब हम अपनी गलतियों को पहचान लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि परिवर्तन अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे, समय के साथ होता है। लेकिन जो व्यक्ति साधना और सुधार के मार्ग पर टिके रहते हैं, उनका जीवन निश्चित रूप से बदलता है।
ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की परिस्थितियों में देखा जाए तो हर व्यक्ति किसी न किसी दबाव में जी रहा है। और इसी दबाव के बीच कई लोग गलत रास्ता चुन लेते हैं या नशे का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नशा उनके दुख, तनाव और परेशानियों को कम कर देगा, लेकिन वास्तव में नशा समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गहरा बना देता है। हमें यह समझना होगा कि हमारा जीवन केवल हमारा नहीं है। हमारे साथ हमारा परिवार भी जुड़ा हुआ है। माता-पिता की उम्मीदें, बच्चों का भविष्य, जीवनसाथी का विश्वास। जब एक व्यक्ति नशे की लत में पड़ता है, तो केवल वही नहीं टूटता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से टूटने लगता है। इसलिए हमें अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्षणिक सुख के लिए लिया गया गलत निर्णय पूरे जीवन को अंधकार में धकेल सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को जो सबसे बड़ी शक्ति दी है, वह है सोचने और समझने की क्षमता। यह क्षमता किसी और प्राणी में नहीं है। यदि समझ होते हुए भी हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो वह हमारी कमजोरी है, न कि मजबूरी। जब हम अपनी समझ का सही उपयोग करते हैं, तभी हम नशे जैसी बुराइयों से खुद को और अपने समाज को बचा सकते हैं।
डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि आज बहुत से लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि अगर नशा नहीं करेंगे तो मन नहीं लगेगा, दिमाग शांत नहीं रहेगा, काम में ध्यान नहीं आएगा। लेकिन यह केवल एक भ्रम है, सच्चाई नहीं। नशा मन को स्थिर नहीं करता, बल्कि उसे और बेचैन बना देता है। कुछ समय के लिए यह दर्द को दबा देता है, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को खोखला कर देता है।
वर्तमान में अनेक प्रकार से नशा हमारे समाज में पांव फैलाता जा रहा है जिनके द्वारा आपके शरीर को आपके दिमाग को नुकसान होता है आपके व्यवहार में भी बदलाव आता है। एडिक्शन की वजह से लीवर खराब हो सकता है। किडनी, पेनक्रियाज, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां या फिर हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहना ही बेहतर है यदि आप नशे के शिकार है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप इसे छोड़ सकते है
शिविर का समापन नशा मुक्त, स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।

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राष्ट्रीय युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी विवेकानंद सेवा समिति द्वारा धर्मगुरुओं का सम्मान किया गया जिसमें शहर के अलग अलग धर्मगुरुओं के साथ ब्रह्माकुमारीज संस्थान से वरिष्ठ राज्ययोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई का सम्मान किया गया।
यह सम्मान पूर्व विधायक श्री मुन्नालाल गोयल, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, स्वामी विवेकानंद सेवा समिति अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री मान. श्री तुलसी सिलाबट, बीजेपी जिलाध्यक्ष अध्यक्ष जय प्रकाश राजोरिया, अनेकानेक धर्मगुरु, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में बीके प्रहलाद भाई नें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकश ड़ालते हुए उनसे प्रेरणा लेकर जीवन को सुन्दर बनाने कि बात कही तो वहीं अन्य अतिथियों नें भी इस विषय पर प्रकश डाला।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के भाई एवं बहनें हुए शामिल

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर शासकीय उ.मा.वि. शिक्षानगर में सामुहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज संस्थान से बीके प्रहलाद भाई, बीके अंजलि बहन, बीके योगेश भाई सहित अन्य भाई-बहनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका सिंह घुरैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान, जिला पंचायत सीईओ श्री सोजान सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, स्कूल के विद्यार्थी, पतंजलि संस्थान के सदस्य आदि शामिल रहे।

 

 

 

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