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ग्वालियर: “आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में”
“आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में”
जिंदगी जबरदस्त है इसको जबरदस्ती नहीं खुलकर जियो – बी के डॉ. प्रेम मसंद (कैंसर स्पेशलिस्ट)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, मेडिकल विंग (राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन) ग्वालियर
के द्वारा दिनांक 15 दिसम्बर को तीन दिवसीय निःशुल्क शिविर का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गयाI
कार्यक्रम में मुख्य रूप से एम. एल. दौलतानी (ब्रांड एम्बेसडर स्वच्छता अभियान एवं पूर्व उपायुक्त न.नि.ग्वा.), श्री
राजेंद्र प्रसाद गुप्ता (प्रांतीय प्रधान भारतीय योग संस्थान ), श्री अश्विनी माहेश्वरी (चार्टेड एकाउंटेंट), अंतर्राष्ट्रीय
मोटिवेशनल वक्ता बीके डॉ. प्रेम मसंद (कैंसर स्पेशलिस्ट), बीके आदर्श बहिन (सेन्टर इंचार्ज), श्री पीताम्बर
लोकवानी, श्री इन्द्रमोहन वर्मा (मुख्य जनरल मैनेजर इलाहाबाद बैंक), बी.के. डॉ. गुरचरण सिंह, श्री महेश अग्रवाल,
श्री राजेंद्र अग्रवाल (भारतीय योग संस्थान ग्वा.), और शहर से अनेकानेक नागरिक उपस्थित थे I कार्यक्रम के
शुभारम्भ में कुमारी हर्षिता के द्वारा स्वागत नृत्य किया गया तत्पश्चात ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र इंचार्ज बी.के. आदर्श
बहन ने सभी का शब्दों के द्वारा स्वागत किया गया | शिविर के प्रथम दिन को संबोधित करते हुए डॉ. प्रेम मसंद
ने कहा कि
स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण समस्या है अगर स्वास्थ्य ठीक है तो सब ठीक है I
जिंदगी जबरदस्त है इसको जबरदस्ती नहीं जबरदस्त तरीके से जीना चाहिए I जो शेष है वही विशेष है जो बीत
गया उस पर फुलस्टॉप लगाकर जो शेष है उसको जबरदस्त तरीके से एंजोयमेंट के साथ जीना चाहिए I
पाँव गरम – पेट नरम – सिर ठंडा ये है स्वस्थ्य जीवन का फंडा I
हमें अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य के लिये एक घंटा रोज देना ही चाहिए कम से कम दस हज़ार कदम रोजाना चलना
चाहिए I disease का अर्थ है शरीर का जो अंग कमजोर है वहां बीमारियों का उभरना I जब में अपने एनर्जी लेवल
को कम कर देता हूँ तो बीमारियाँ आती हैं बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है शरीर में ऑक्सीजन की कमी I हमारे
शरीर के जिस भी भाग में ऑक्सीजन की कमी आती है या यूँ कहें की एनर्जी लेवल कम हो जाता है उस भाग में
बीमारी उभरने लगती है अगर ऑक्सीजन शरीर में पूरी तरह जाता है तो बीमारियाँ नहीं होती हैं I इसके साथ ही
उन्होंने बताया कि शरीर में ह्रदय व फेफड़े दो मत्वपूर्ण पंप हैं जैसे-जैसे तनाव बढता है हृदय का रिलैक्सेशन कम हो
जाता है यदि हृदय 0.5 रिलैक्स करता है तो 0.4 ही रिलैक्स करेगा और यदि तनाव जैसे जैसे बढता जायेगा हृदय
का रिलेक्सेशन 0.3 हो जायेगा अतः जितना हृदय कम रिलैक्स करेगा उतना कम ऑक्सीजन आएगी और बीमारी
आती जाएँगी I और आज जितना तनाव बढता जा रहा है हृदय का रिलैक्सेशन उतना ही कम होता जा रहा है जो
की आज हमें हार्ट-अटैक के रूप में देखने मिलता है I आज विश्व भर में डिप्रेशन इतनी कॉमन बीमारी हो गयी है
जो कि हर उम्र के लोगों में देखने को मिलती है यदि इसे जल्द से जल्द ठीक नहीं किया गया तो आने वाले समय
में हर चार व्यक्ति में से एक को इस बीमारी से ग्रसित देखेंगे I हमारी इमोशनल भावनाएं हमारे शरीर को नुकसान
पहुंचाती हैं हमारी 90% बीमारियों का कारण ही है इमोशनल स्ट्रेस I इसके लिये अपने आप को शारीरिक,मानसिक,
भावनात्मक, सामाजिक, आध्यात्मिक रूप से रोजाना चार्ज करें एनर्जी लें I हमारा शरीर, माइंड, रिलेशनशिप , सोशल
लाइफ ठीक होना चाहिए I भाईजी ने बताया दो चीजें हैं माइंड और मैटर I यदि में किसी चीज़ को माइंड नहीं करता
हूँ सीरियस नहीं लेता हूँ तो कुछ नहीं होगा मेरे शरीर पर उसका कोई इफ़ेक्ट नहीं पड़ेगा और यदि में किसी चीज़
को माइंड करता हूँ सीरियस लेता हूँ कि दूसरे क्या बोलेंगे या वह मेरे लिये क्या सोचेंगे और निरंतर व्यर्थ चिंतन
करता रहता हूँ तो में तनाव वाले हार्मोन्स रिलीज़ करने लगता हूँ और यदि में किसी चीज़ को ज्यादा सीरियस ले
रहा हूँ तो एड्रिनल हार्मोन ज्यादा रिलीज़ होने लगता है जो हार्मफुल है I जितना आप सीरियस रहेंगे उतना ही
बीमारियाँ आती जाएँगी और जितना ही आप लाइट रहेंगे मस्त रहेंगे उतना ही बीमारियाँ आपसे दूर रहेंगीI ना
दिखना है ना दिखाना है अपने को देखना है हमारा आधा तनाव दूसरों को दिखावा करने से आता है अगर किसी
ने कुछ बोल दिया या गलत कर दिया है तो पकड़कर नहीं बैठ जाना है एंजोयमेंट के साथ जीना है एन्जॉय का अर्थ
ही joy-in I अगर एंजोयमेंट के साथ जीयेंगे तो कभी एंजियोप्लास्टी नहीं करानी पड़ेगीI कभी कभी बच्चे बन जाओ जो
अच्छा लगे वही करो अपने बचपने को जीना है क्यों कि इससे जो हार्मोन्स रिलीज़ होते हैं उनकी शरीर को बड़ी
जरूरत होती है I
यदि में बीमार हूँ और मेरी स्वयं में आस्था है कि में ठीक होऊंगा , मेडिसिन का अपना रोल है लेकिन मेरे स्वयं
का मेरे शरीर को हील करने के लिये अपना रोल है बीमारी का अर्थ ही अपने आप को प्यार दें अटेंशन दें I रोज
अपने आप को प्यार करें अपने बीमारी वाले भाग को एनर्जी दें कि तुम बहुत अच्छे हो ठीक हो पूर्ण रूप से स्वस्थ
हो अपना काम अच्छी तरह से कर रहे हो अर्थात् स्वयं ही स्वयं को एनर्जी दें और मेडिसिन के साथ स्वयं ही स्वयं
को हील करें I स्वयं में परिवर्तन आदतों में परिवर्तन लायें और सुन्दर स्वस्थ हेल्दी लाइफ पायें I
साथ ही कुछ टिप्स भी शेयर किये कि यदि कब्ज निरंतर बनी रहती है तो डॉ. से कंसल्ट करें ऐसा आहार ना लें
जो आपको कब्ज बनाता है आहार में रेशेदार , फाइबर युक्त भोजन शामिल करें और भरपूर मात्र में पानी पियें
खाना धीमे –धीमे एन्जॉय करके खायें पानी सिप लेकर पियें I
सुगर लेवल मेन्टेन रखें खाने के बाद सुगर 140-150 से अधिक ना हो तथा बिना खाए सुगर 126 से अधिक न हो
क्यों कि 180 तक ब्लड में सुगर का लेवल बने रहना साइलेंट हार्ट-अटैक का कारण है I
खाने में कहीं न कहीं कुछ मात्रा में काली मिर्च व दालचीनी को शामिल करें क्योंकि काली मिर्च एस्पिरिन का काम
करती है I
6-7 घंटे की गहरी नींद लें क्योंकि 90% बॉडी रात में सोते समय हील होती है यदि नींद गहरी नहीं होगी तो शरीर
हील नहीं हो पायेगा जो कई बीमारीयों को आमंत्रण देगा I
अमरुद, पपीता, अनार जैसे फलों को डेली आहार में शामिल रखें क्योंकि ये फल कैंसर जैसे रोगों के होने को कम
करते हैं I
जितना हम अपने मन में सकारात्मक विचार लायेंगे उतना ही हम जीवन का आनंद ले पायेंगे –
ग्वालियर: ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा लगाये गए तीन दिवसीय शिविर के समापन सत्र में यह बात डॉ प्रेम मसंद
ने कही कि जितना हम अपने मन में सकारात्मक विचार लायेंगे उतना ही हम अपने जीवन का आनंद ले सकते है
क्योकि जब कोई व्यक्ति पैदा होता है या यूँ कहें कि जब कोई आत्मा इस सृष्टी पर आती है तो प्रत्येक अपनी एक
विशेषता के साथ आती है प्रत्येक आत्मा की अपनी क्षमता और प्रत्येक की अपनी एक जगह है स्पेस है जिस भी
व्यक्ति या आत्मा को वह स्पेस मिला वही ऊचाईयों तक गए हैं और जिनको यह स्पेस नही मिला वह उतना
आउटपुट नहीं दे सके जितना वो दे सकते थे अतः हम सभी को अपनी –अपनी आत्मा के उस फ्री स्पेस को
एक्टिवेट करना है साथ ही माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों में उपस्थित उस फ्री स्पेस को एक्टिवेट
करायें उन्हें कम से कम उपदेश दें क्योंकि प्रत्येक आत्मा की अपनी क्षमता है प्रत्येक अद्वितीय है I आज की सबसे
बड़ी समस्या है नकारात्मक विचार और एक बिजी माइंड I हमारा मन एक ही समय पर कई प्रकार की चीजें सोचता
रहता है कई विचार एक साथ मन में चलते रहते हैं या दूसरे शब्दों में यूँ कहें कि कई फाइल्स एकसाथ माइंड में
ओपन रहती हैं और हर फाइल अपनी एनर्जी लेती है इसलिए कौन सी फाइल कब खोलनी है यह मुझे आना चाहिए
I आजकल हमारी अपेक्षाएँ बढती ही जा रहीं हैं अनिश्चितता ने हमें घेर लिया है सबसे बड़ी घबराहट व्यक्ति को तब
आती है जब उसके मन में यह प्रश्न आता है कि यह क्यों हो रहा है या क्या होने वाला है लेकिन सही मायने में
जिंदगी पूरी ही अनिश्चित है अनिश्चितता हमारी ज़िन्दगी का पार्ट है निश्चितता होती ही नहीं है केवल एक ही चीज़
निश्चित है वह है अनिश्चितता I जब पूरी ज़िन्दगी ही अनिश्चित है तो क्या करें इसका सबसे बढ़िया तरीका है उस
अनिश्चितता को एन्जॉय करें मजे करें I किसी की भी ज़िन्दगी समस्याओं से मुक्त नहीं है प्रत्येक के जीवन में
कुछ न कुछ समस्याएं हैं हीं ऐसा कोई भी दिन नहीं आयेगा जब कोई समस्या नहीं आएगी इसलिए समस्याओं को
भी एन्जॉय करो समस्याएँ तो आती ही रहेंगी कुछ अपने आप ठीक हो जाएँगी कुछ स्वयं हमें ठीक करनी होंगी और
कुछ को परमात्मा पर छोड़ना होगा I आप वही बन रहें हैं जैसा आप सोच रहे हैं एनर्जी कहीं और नहीं हमारे
संकल्पों में ही है प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर चार प्रकार के विचार होते हैं सकारात्मक, नकारात्मक, आवश्यक और
व्यर्थ I सबसे पहले हमें अपने नकारात्मक विचारों को समझना है और उनको परिवर्तित करना है अपने नकारात्मक
विचारों को सकारात्मक में परिवर्तित करो अगर हम अपनी नकारत्मक फाइल खोलते हैं तो नकारात्मक ही होगा
अगर सकारात्मक फाइल खोलते है तो सकारात्मक होगा I हर व्यक्ति के अंदर दोनों ही प्रकार की फाइल्स हैं
नकारात्मक और सकारात्मक I अगर नकारात्मक विचार मन में आ रहे हैं तो उन्हें सकारात्मक विचारों से हटा दो I
अपने मन और मस्तिष्क को सकारात्मकता की ट्रेनिंग देते रहो जो भी नकारात्मक भर रखा है उसको निकालते रहो
उसको पकड़कर के नहीं बैठना है पकड़कर के बैठेंगे तो समस्या दुःख देगी और छोड़ देंगे तो जीवन में हल्कापन
महसूस होगा I पहला परिवर्तन रोज सुबह अपने संकल्पों में करें कि में जो हूँ जैसा हूँ बहुत अच्छा हूँ जो है आपके
पास उसके लिये परमात्मा को धन्यवाद दें जो है उसी का उपयोग करें क्योंकि व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या यही
है की जो हमारे पास नहीं है हम उसकी चिंता करते हैं और जो है उसको देखते भी नहीं हैं एक भी नकारात्मक
कम्प्लेंट ना अपने लिये करें ना अपने से सम्बंधित लोगों के लिये करें तो सबकुछ ठीक होने लगेगा I प्रत्येक दिन
यह विचार जरुर करें कि आज के दिन मैंने अच्छा क्या किया I प्रत्येक दिन को प्लान करें और उसके अनुसार कार्य
करें I अपने लिये छोटे-छोटे लक्ष्य बनायें और उन्हें प्राप्त करें I पहले छोटा सोचें फिर बड़ा करें हमेशा सकारात्मक रहें
I
साथ ही कुछ हेल्थ टिप्स दिए-
विटामिन –डी और बी-12 का टेस्ट 25 के बाद जरुर करायें I अगर 200 pg/ml से बी-12 का लेवल कम है तो इसमें
इम्प्रूवमेंट लाना पड़ेगा I बी-12 के प्रोडक्ट, टेबलेट ,इंजेक्शन आज उपलब्ध हैं I साथ ही विटामिन –सी हमारी रोग
प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है खट्टे फल का उपयोग जरुर करें I एक खट्टा फल और एक मीठे फट का सेवन
जरुर करें I रेशा कम से कम 40 ग्राम रोजाना शरीर में जाना चाहिए I रेशा हमारे कई कैंसर को ठीक करता है
फाइबर हमारी आँतों को साफ़ करता है आँतों के कैंसर का एक मत्वपूर्ण कारण यही है कि रेशा मेरी आँतो में नहीं
जाते I और साथ ही मोबाइल का प्रयोग जितना जरुरी हो उतना ही करें क्योकि इससे भी रेडिएशन निकलता है I
कार्यक्रम के अंत में डॉ गुरचरण सिंह से ने सभी को एक्सरसाइज कराई एवं बी.के. आदर्श बहन जी ने राजयोग
मैडिटेशन के द्वारा सभी को गहन शांति की अनुभूति कराई साथ ही साथ सभी को स्वस्थ्य एवं सुखद जीवन के
लिये शुभकामनायें दी
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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।
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Indraganj Lashkar2 months agoअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग








