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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

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ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय आध्यात्मिक ज्ञान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा और राजयोग ध्यान के साथ साथ विगत कई वर्षो से शासन, प्रशासन के साथ मिलकर अपने स्वयं सेवकों के साथ लगातार पर्यवारण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण एवं नशामुक्ति अभियान जैसे अनेक सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बीते रोज बाल भवन में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान में जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
जिसमें ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के वरिष्ठ प्रेरक वक्ता और समाजसेवी बीके प्रहलाद भाई को भी सम्मान दिया गया।
यह सम्मान संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर बीके पवन ने प्राप्त किया।
यह सम्मान सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में दिया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जीडीए के अध्यक्ष श्री मधुसूदन सिंह भदौरिया, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन, साडा अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, मेला उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह सहित जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका घुरैया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत व अपर आयुक्त नगर निगम श्री टी. प्रतीक राव मुख्यरूप से उपस्थित थे।

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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

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उत्कृष्ट योगदान देने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के प्रतिनिधि को मंत्री श्री कुशवाह ने किया सम्मानित

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय आध्यात्मिक ज्ञान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा और राजयोग ध्यान के साथ साथ विगत कई वर्षो से शासन, प्रशासन के साथ मिलकर अपने स्वयं सेवकों के साथ लगातार पर्यवारण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण एवं नशामुक्ति अभियान जैसे अनेक सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बीते रोज बाल भवन में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान में जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
जिसमें ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के वरिष्ठ प्रेरक वक्ता और समाजसेवी बीके प्रहलाद भाई को भी सम्मान दिया गया।
यह सम्मान संस्थान के प्रतिनिधि के तौर पर बीके पवन ने प्राप्त किया।
यह सम्मान सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में दिया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जीडीए के अध्यक्ष श्री मधुसूदन सिंह भदौरिया, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन, साडा अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया, मेला उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह सहित जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रियंका घुरैया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत व अपर आयुक्त नगर निगम श्री टी. प्रतीक राव मुख्यरूप से उपस्थित थे।

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

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हमें अपने कर्मों से समाज और राष्ट्र के लिए उदाहरण बनना चाहिए – बीके आदर्श दीदी

ग्वालियर। माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउंडेशन के युवा प्रभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में आत्मशक्ति, राष्ट्रभक्ति एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का संचार करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, आनंद विभाग के संयोजक एवं समाजसेवी पवन दीक्षित, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लश्कर के जिला प्रचारक रोहित जी, युवा समाजसेवी हर्षित शर्मा, सौरभ सिकरवार, युवा प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई सहित अनेकानेक युवा भाई एवं बहनें उपस्थित थे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतवर्ष की गौरवशाली परंपरा और युवाओं की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर बीके आदर्श दीदी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने भीतर छिपी हुई शक्तियों को पहचानें और उन्हें जाग्रत करें। परमात्मा ने किसी को भी कमजोर बनाकर नहीं भेजा है, आवश्यकता केवल अपनी सामर्थ्य पर विश्वास करने की है। उन्होंने कहा कि जीवन केवल जीने के लिए नहीं, बल्कि किसी ऊँचे उद्देश्य के लिए जिया जाना चाहिए। स्वामी विवेकानंद जी को आज इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने विचारों और कर्मों से अपने जीवन को एक जीवंत संदेश बना दिया। हमें भी अपने कर्मों से समाज और राष्ट्र के लिए उदाहरण बनना चाहिए।

रोहित जी ने कहा कि हमारा देश भारतवर्ष, जिसे अखंड भारतवर्ष के नाम से भी जाना जाता है, केवल एक भू-भाग नहीं है, बल्कि त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। भारत का युवा अनेक भावनाओं के साथ आगे बढ़ता है, जिनमें सबसे पवित्र भाव देशभक्ति का है। स्वामी विवेकानंद जी ने भारत के युवाओं को जाग्रत करते हुए उन्हें अपनी आंतरिक शक्ति का बोध कराया।

पवन दीक्षित ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद जी की जयंती आज पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इसका कारण उनका त्याग, चरित्र, राष्ट्रप्रेम और युवाओं के प्रति समर्पण है। उन्होंने कहा कि जब वरिष्ठजन सत्य, अनुशासन और सेवा का आदर्श सामने रखेंगे, तभी युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए बीके प्रहलाद भाई ने कहा कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” का अमर संदेश स्वामी विवेकानंद जी ने दिया, जो आज भी युवाओं के लिए जीवन जीने की दिशा तय करता है। उन्होंने आगे बढ़ती हुई नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल युवाओं के जीवन को, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को भी कमजोर कर रही है। युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरणा लेकर उनके विचारों को आत्मसात कर आत्मबल, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर ओर हर्षित शर्मा और सौरभ सिकरवार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण को अच्छा बनाये रखने के लिए सिंगल यूज़ प्लास्टिक को उपयोग न करने की शपथ भी ली।

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