Indraganj Lashkar
पुलिसकर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्ति शिविर का सफल आयोजन
सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने से नशे से दूर रहा जा सकता है – प्रहलाद भाई
राजयोग ध्यान से मन की एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है – बीके आदर्श दीदी
पुलिसकर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्ति शिविर का सफल आयोजन
ग्वालियर। 14वीं वाहिनी वि. स. बल ग्वालियर के द्वारा पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों के लिए 14वीं वाहिनी के सेनानी संजीव कुमार सिन्हा के निर्देशन में तथा सहायक सेनानी रत्नेश तोमर के मार्गदर्शन मे मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्ति जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय ग्वालियर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी तथा प्रेरक वक्ता एवं राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई, 14 वीं वाहिनी से डॉ ओम प्रकाश वर्मा उपस्थित थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य तनावपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, उनके जीवन में सकारात्मकता लाना तथा नशा जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के शुभारंभ में बीके आदर्श दीदी ने नशा से दूर रहने के लिए के लिए सरल एवं व्यावहारिक उपाय बताते हुए कहा कि व्यवस्थित दिनचर्या, योग एवं ध्यान का अभ्यास हमें अपनी नियमित दिनचर्या में करना चाहिए। दीदी ने कहा कि जब मन संतुष्ट और शक्तिशाली होता है, तब व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशे की आवश्यकता महसूस नहीं होती। लेकिन जब व्यक्ति के जीवन में किसी भी प्रकार कि चिंता आती है तो व्यक्ति नशे कि तरफ जाने का प्रयास करता है जबकि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। स्थायी समाधान चाहिए तो अपना संग अच्छा रखें और अपने को रचनतामक कार्यों मे व्यस्त रखें। दीदी ने सभी को राजयोग ध्यान के बारे में बताया तथा उसको जीवन का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि नियमित राजयोग ध्यान से मन की एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है तथा व्यक्ति आत्मिक रूप से सशक्त बनता है।
कार्यक्रम मे मुख्य वक्ता के रूप मे मोटिवेशनल स्पीकर बीके प्रहलाद भाई ने अपने प्रेरणादायक एवं प्रभावशाली उद्बोधन में कहा कि आज का मनुष्य बाहरी पहचान, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक उपलब्धियों में इतना उलझ गया है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को भूल चुका है। जबकि सच्चाई यह है कि जब व्यक्ति स्वयं को आत्मा के रूप में पहचानता है, तभी उसके भीतर आत्मविश्वास, आंतरिक शांति और मानसिक संतुलन का वास्तविक विकास होता है। उन्होंने आगे कहा कि आपका कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण और तरह तरह की परिस्थितियों का सामना करने वाला क्षेत्र है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। यदि मन कमजोर होता है, तो व्यक्ति नकारात्मक प्रवृत्तियों, विशेषकर नशे जैसी आदतों की ओर आकर्षित हो सकता है। नशे के दुष्प्रभावों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके पारिवारिक, सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करता है। यह धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और व्यक्तित्व को कमजोर बना देता है।
उन्होंने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन में सकारात्मक सोच, आत्म-संयम, नियमित ध्यान (मेडिटेशन) और आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाते हैं, तो हम न केवल नशे से दूर रह सकते हैं, बल्कि एक सशक्त और संतुलित जीवन भी जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि नशा पल भर की राहत देता है, लेकिन जीवन भर की परेशानी बन जाता है। इसलिए ध्यान रखें स्वयं पर जीत ही सबसे बड़ी जीत है। नशे से दूरी बनाकर रखना ही सबसे बेहतर है।
इसके साथ ही उन्होंने राजयोग ध्यान का अभ्यास कराते हुए उपस्थित सभी को गहन शांति, आनंद एवं आंतरिक सुकून की अनुभूति कराई। ध्यान के दौरान पूरे परिसर में एक दिव्य एवं सकारात्मक वातावरण का अनुभव हुआ।
कार्यक्रम में डॉ ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि यदि किसी को ड्रग एडिक्शन है उसे नशे की बीमारी है और उसकी इलाज लेना बहुत जरूरी है ज्यादा नशे से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं सबसे पहले आर्थिक समस्याएं हो सकती है बहुत सारे पैसे नशे में खर्च होते हैं तो कई बार यह पैसे कहीं और इस्तेमाल हो सकते हैं इन्वेस्ट किया जा सकता है आर्थिक समस्याएं सबसे बड़ा परेशानियां है जो कि होती है दूसरा मानसिक परेशानियां हो सकती है डिप्रैशन एंजायटी साइकोसिस या फिर बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी परेशानियां हो सकती है कई लोगों को मेमोरी लॉस हो सकता है कमजोर हो सकती है। पहली बात तो सभी को नशे से दूर रहना चाहिए फिर भी यदि कोई किसी कारण से इसका शिकार हो गया है तो उसे डॉ से सलाह लेकर छोड़ना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह शिविर उनके लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणादायक रहा। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से नशामुक्त जीवन जीने, मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने तथा आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे उत्साह एवं गंभीरता के साथ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। जिसमें निरीक्षक राकेश शर्मा, निज सहा. दिनेश कुमार, निरीक्षक संतोष कुमार, उप निरीक्षक धर्मपाल सिंह, सतीश शर्मा, अमित सेंगर, कौशलेन्द्र शर्मा, मुरारी सिंह, ज्वाला प्रसाद, रेखा करारिया, विलास सोलसेकर, सहा. उप निरीक्षक रवींद्र रावत, राजीव सिंह, रवींद्र सिंह, मुन्ना लाल, सुरेश राव, सोनम सिंहम, भुवनेश्वरी, उदय प्रताप सिंह सहित लगभग एक सैकड़ा से अधिक पुलिसकर्मी उपस्थित थे।

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ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम मुख्य प्रशासिका के रूप में सौंपी थी जिम्मेदारी
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस गुरुवार को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन, पुराना हाईकोर्ट लाइन स्थित संगम भवन सहित ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सभी केंद्रों पर ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक विशेष राजयोग-साधना एवं स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रातः एवं सायंकाल आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मम्मा की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लश्कर ग्वालियर केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि मातेश्वरी जी सदैव सजग, अनुशासित और सटीक निर्णय लेने वाली महान आत्मा थीं। उनकी विशेषता थी कि “बाबा का कहना और मम्मा का करना।” जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आईं, उन्होंने सदैव गंभीरता, धैर्य और दृढ़ता के साथ उनका सामना किया तथा सभी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
अमृतसर में हुआ था जन्म
मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ओम राधे था। कहा जाता है कि जब वे ‘ओम’ का उच्चारण करती थीं तो वातावरण में गहन शांति का अनुभव होता था, इसलिए वे ओम राधे के नाम से विख्यात हुईं। बचपन से ही वे कुशाग्र बुद्धि, प्रतिभाशाली एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा द्वारा सुनाई गई ज्ञान की बातों को वे एक बार में ही आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेती थीं। 24 जून 1965 को उन्होंने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर संपूर्णता की अवस्था को प्राप्त किया।
1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी
बीके ज्योति बहन ने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने माताओं एवं बहनों के नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसकी प्रथम जिम्मेदारी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को सौंपी गई। उन्होंने 24 जून 1965 तक संस्थान की बागडोर अत्यंत कुशलता, दूरदर्शिता और समर्पण भाव से संभाली। कम आयु होने के बावजूद उनका गंभीर व्यक्तित्व, आध्यात्मिक ज्ञान की गहराई और नेतृत्व क्षमता सभी को आश्चर्यचकित कर देती थी। मम्मा के अव्यक्त होने के पश्चात ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी।
बीके प्रहलाद भाई एवं बीके डॉ. गुरचरन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आदर्श मूल्यों की जीवंत मिसाल था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि मनुष्य पवित्रता, विनम्रता, सहनशीलता तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण को अपनाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का माध्यम बन सकता है। उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का अद्भुत संगम था।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर के सभी सेवा केंद्रों पर सैकड़ों भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग
योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन में हुआ योग

योग जीवन जीने की एक समग्र पद्धत्ति है – आदर्श दीदी
“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम के अंतर्गत स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दिया गया संदेश
सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (Yoga for Healthy Ageing) थीम के अंतर्गत एक विशेष योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों, माताओं, युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय योगा प्रोटोकाल के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र प्रमुख आदर्श दीदी एवं ब्रह्माकुमारी सुरभि बहन ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान अभ्यास करवाए।
केंद्र प्रभारी बीके आदर्श दीदी ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा के स्तर पर सशक्त बनाती है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं बुद्धि एकाग्र रहती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या एवं बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह शारीरिक क्षमता को बनाए रखने, मानसिक तनाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि राजयोग व्यक्ति को अपनी आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से जुड़कर आंतरिक शांति एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। नियमित राजयोग अभ्यास से व्यक्ति के विचारों में सकारात्मकता आती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान योग दिवस की इस वर्ष की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” पर चर्चा की गई। सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं ध्यान करने तथा अपने परिवार एवं समाज में भी योग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास कर अपने शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। अंत मे कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
ग्वालियर दुर्ग पर प्रशासन की ओर से आयोजित सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज के भाई बहनें भी हुए शामिल
ग्वालियर दुर्ग पर आयोजित जिला प्रशासन द्वारा जिले के सामूहिक योग अभ्यास में ब्रह्माकुमारीज से वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद, बीके सोनिया, बीके खुशी, बीके नरेश सहित 80 से अधिक भाई एवं बहनें शामिल हुए।
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