मध्यप्रदेश किसान सशक्तिकरण अभियान 5 दिन के लिए ग्वालियर जिले में

मध्यप्रदेश किसान सशक्तिकरण अभियान 5 दिन के लिए ग्वालियर जिले में

ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था “राजयोग एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउंडेशन” के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग माउंट आबू के द्वारा पूरे मध्यप्रदेश किसान सशक्तिकरण अभियान चलाया जा रहा है इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश की चारो दिशायों में “किसान सेवा रथ” निकाले गए है जिसमें से एक यात्रा 5 दिन के लिए ग्वालियर जिले में पहुँची प्रारंभ के दो दिन लश्कर सेवाकेंद्र के आसपास के गाँवों नागौर, सिकरोदा, अणुपुरा, बड़ोरी, तुरारी, रवारा, रौरा, गब्बरपुरा, विक्की फैक्ट्री सिकरौदा, ओडपुरा, तालपुरा, सौजना, गोकुलपुर, वीरपुर भगवानपुर आदि में जाकर किसानों को जागरूक किया | एवं कृषि महाविद्यालय एवं अन्य संस्थानों में अनेकानेक कार्यक्रम किये |

· परंपरागत शाश्वत यौगिक खेती कर पौष्टिक अन्य का उत्पादन के बारे में किसानों को बताया गया |

· किसानों को व्यसन मुक्त बनाने के लिए प्रेरित किया |

· अंध विश्वास एवं कुप्रथायों के वारे में बताया |

· खेती की लागत कम करने के उपाय बताये |

· नकारात्मक चिंतन को समाप्त कर सकारात्मक सोच उत्पन्न करना सिखाया |

· आचरण एवं विचारों की शुद्धता द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ भारत का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया |

· अध्यात्मिक जागृति द्वारा आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए भी बताया |

· सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही सुबिधाओं की जानकारी भी उन्हें दी गयी |

इस यात्रा रथ का संचालन दो दिन के लिए ब्रह्माकुमारीज लश्कर सेवाकेंद्र की संचालिका आदरणीया राजयोगिनी आदर्श बहन जी ने किया इसके साथ ही इस अभियान में माउंट आबू से बी.के. राघव भाई, बी.के. जगदीश भाई, बी.के. चंद्रप्रकाशभाई, बी.के. विजय भाई (हरियाणा), बी.के. सुधा बहिन, बी.के. अर्चना बहिन, बी.के. स्वाति बहिन (बुरहानपुर), बी.के. सरस्वती, बी.के. कविता (अलीगढ़), बी.के. पूनम (होडल) आदि जगह से भाई एवं बहनें शामिल थे |

इसके तत्पश्चात बांकी के तीन दिन यह यात्रा ग्वालियर क्षेत्र के अन्य सेवाकेंद्र तानसेन नगर, आजाद नगर मुरार, सिटी सेंटर, महाराजपुरा एवं डबरा के गाँवों को कवर करती हुई आगे बढ़ गई |

ग्वालियर: जी.आर. मेडिकल कॉलेज

ग्वालियर: जी.आर. मेडिकल कॉलेज, PSM Department में “शांति एवं ख़ुशी का अनुभव करने के लिए राजयोग मैडिटेशन की भूमिका” विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में बी.के. प्रह्लाद ने सभी को संबोधित करते हुए स्वयं का सत्य परिचय, पिता परमात्मा का सत्य परिचय देते हुए राजयोग मैडिटेशन की विस्तार से सभी को जानकारी दी एवं सभी को राजयोग मैडिटेशन का अभ्यास भी कराया | कार्यक्रम में PSM डिपार्टमेंट के HOD डॉ.अशोक मिश्रा जी सहित सभी प्रोफेसर एवं डॉ. निर्मला कंचन ने भाग लेकर मैडिटेशन का गहन अनुभव लिया |

जलाभिषेक अभियान के अंतर्गत वीरपुर बाँध पर ब्रह्माकुमारीज् संस्थान के भाई एवं बहनों नें किया श्रमदान

ग्वालियर: जिला प्रशासन एवं नगर निगम के द्वारा जलाभिषेक अभियान चलाया गया जिसके अंतर्गत वीरपुर बाँध पर ब्रह्माकुमारीज् संस्थान के भाई एवं बहनों नें किया श्रमदान किया इसके साथ ही
सभी का उमंग उत्साह बढ़ाने के लिए फोटो न. – 2(1), 4(1), 74002,74003,74042, 74045 बाएं से दायें ग्वालियर कलेक्टर मान.श्री राहुल जैन जी, ग्वालियर एस.पी. मान.डॉ आशीष जी, आदरणीया ब्रह्माकुमारी आदर्श बहन जी (संचालिका लश्कर ग्वालियर सेवाकेंद्र), नगर निगम कमिश्नर मान.श्री विनोद शर्मा जी एवं साथ मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री माननीय.श्री नारायण सिंह कुशवाह जी ने भी श्रमदान कर सभी का उमंग उत्साह बढ़ाया एवं सभी को अपनी शुभकामनाएं भी दीं।

इस अवसर पर बाद में एक कार्यक्रम में अन्य अतिथि मान. श्री विवेक नारायण शेजवलकर जी(महापौर), मान.श्री भारत सिंह कुशवाह जी(विधायक) संभागीय कमिश्नर मान. श्री बी.एम्. शर्मा जी, मान.ग्वालियर आई.जी., सहित अन्य जन प्रतिनिधि एवं अधिकारी आदि भी कार्यक्रम में उपस्थित रहें और अपनी शुभकामनाएं दीं ।

इसमें ब्रह्माकुमारीज् संस्थान की ओर से लगभग 300 भाई एवं बहनों सहित अन्य समाज सेवी संस्थाओं, शासकीय संस्थाओं के हजारों लोगो ने भी श्रमदान किया।
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?हार्दिक ईश्वरीय निमंत्रण ? “World Earth Day” के उपलक्ष्य में- ब्रह्माकुमारीज् ग्वालियर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित है। दिनांक : 22 अप्रैल 2018, दिन : रविवार समय – प्रातः 7 बजे से 9 बजे स्थान – ब्रह्माकुमारीज प्रभु उपहार भवन, मेंन रोड डॉ आहूजा के सामने माधवगंज लश्कर ग्वालियर

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11 फ़रवरी 2018 – जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर

11 फ़रवरी ग्वालियर: जीवाजी विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, मध्य प्रदेश शासन, हरियाणा रेड क्रॉस सोसाइटी, एलिम्को  एवं जिला प्रशासन ग्वालियर के तत्वाधान में दिव्यांग हितार्थियों को नि:शुल्क सहायक उपकरण भेंट करने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे भारत के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी के द्वारा दिव्यांग लोगों को नि:शुल्क सहायता उपकरण भेंट किये गए जिसमे महामहिम राष्ट्रपति के साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चन्द्र गहलोत, म.प्र. राज्यपाल श्रीमति आनंदीबेन पटेल, म.प्र. के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी तथा बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, श्री जयभान सिंह पवेया (कैविनेट मंत्री म.प्र. शासन) और श्रीमति माया सिंह (कैविनेट मंत्री म.प्र. शासन) आदि उपस्थित थे | कार्यक्रम में कई शासकीय-अशासकीय संस्थायों से सेवाधारी उपस्थित थे इसी कार्यक्रम में दिव्यांग भाई बहिनों की सेवा के लिये ब्रह्माकुमारीज संसथान से भी 50 भाई बहिनों ने अपना सहयोग दिया तथा ब्रह्माकुमारी की ओर से नशामुक्ति की प्रदर्शनी भी लगायी गयी जिसमे हजारों लोगों ने संदेश प्राप्त |

Sanskar Kranti (Transformation) is the Spiritual Significance of Makar Sankranti

Sanskar Kranti (Transformation) is the Spiritual Significance of Makar Sankranti.  Brahma Kumaris in Gwalior organized a special program on the ocassion of the festival Makar Sankranti during which B.K. Dr. Gurucharan shared the spiritual significance of different rituals performed during the festival time.
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ग्वालियर : ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवाकेंद्र माधोगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कई भाई बहनों ने शिरकत की । संक्रांति का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए बी के डॉ गुरचरन सिंह ने कहा कि अभी कलियुग का अंतिम समय चल रहा है, सारी मानवता दुखी-अशांत हैं, हर कोई परिवर्तन के इंतजार मेँ हैं, सारी व्यवस्थाएं व मनुष्य की मनोदशा जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। ऐसे समय मेँ विश्व सृष्टिकर्ता परमात्मा शिव कलियुग, सतयुग के संधिकाल अर्थात संगमयुग पर ब्रह्मा के तन मेँ आ चुके हैं।
जिस प्रकार भक्ति में पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य आदि का महत्व होता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम संगमयुग, जिसमें ज्ञान स्नान करके बुराइयों का दान करने से, पुण्य का खाता जमा करने वाली हर आत्मा उत्तम पुरुष बन सकती है। मकर संक्रांति पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं का मेला विभिन्न नदियों के घाटों पर लगता है। वास्तव में इन स्थूल परम्पराओं मे आध्यात्मिक रहस्य छुपे हुए हैं। इस दिन खिचड़ी और तिल का दान करते हैं, इसका भाव यह है कि मनुष्य के संस्कारों मेँ आसुरियता की मिलावट हो चुकी है, अर्थात उसके संस्कार खिचड़ी हो चुके हैं, जिन्हें परिवर्तन करके अब दिव्य संस्कार धारण करने हैं । इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक मनुष्य को ईर्ष्या-द्वेष आदि संस्कारों को छोडकर संस्कारों का मिलन इस प्रकार करना है, जिस प्रकार खिचड़ी मिलकर एक हो जाती है। परमात्मा की अभी आज्ञा है कि तिल समान अपनी सूक्ष्म से सूक्ष्म बुराइयों को भी हमें तिलांजलि देना है। जैसे उस गंगा मेँ भाव-कुभाव से ज़ोर जबर्दस्ती से एक दो को नहलाकर खुश होते हैं और शुभ मानते हैं; इसी प्रकार अब हमें ज्ञान गंगा मेँ नहाकर और एक दो को नहलाकर मुक्ति-जीवनमुक्ति का मार्ग दिखाना है। जैसे जब नयी फसल आती है तो सभी खुशियाँ मनाते हैं। इसी प्रकार बुराइयों का त्याग करने से वास्तविक और अविनाशी खुशी प्राप्त होती है । फसल कटाई का समय देशी मास के हिसाब से पौष महीने के अंतिम दिन तथा अंग्रेजी महीने के 12,13, 14 जनवरी को आता है। इस समय एक सूर्य राशि से दूसरी राशि मेँ जाता है। इसलिए इसे संक्रमण काल कहा जाता है, अर्थात एक दशा से दूसरी दशा मेँ जाने का समय। यह संक्रमण काल उस महान संक्रमण काल का यादगार है जो कलियुग के अंत सतयुग के आरंभ मेँ घटता है। इस संक्रमण काल मेँ ज्ञान सूर्य परमात्मा भी राशि बदलते हैं। वे परमधाम छोड़ कर साकार वतन मेँ अवतरित होते हैं। संसार में आज तक अनेक क्रांतियाँ हुई, कभी सशस्त्र क्रांति, कभी हरित क्रांति, कभी श्वेत क्रांति आदि आदि। हर क्रांति के पीछे उद्देश्य – परिवर्तन रहा है। इन क्रांतियों से आंशिक परिवर्तन तो हुआ, किन्तु सम्पूर्ण लाभ और सम्पूर्ण परिवर्तन को आज भी मनुष्य तरस रहा है । वह बाट जोह रहा है ऐसी क्रान्ति की जिसके द्वारा आमूल-चूल परिवर्तन हो जाए । संक्रांति का त्योहार संगमयुग पर हुई उस महान क्रांति की यादगार मेँ मनाया जाता है । सतयुग मेँ खुशी का आधार अभी का संस्कार परिवर्तन है, इस क्रांति के बाद सृष्टि पर कोई क्रांति नहीं हुई । इस त्यौहार के विभिन्न क्रिया कलापों का आध्यात्मिक अर्थ बताया-

1) स्नान – ब्रह्म मुहूर्त मेँ उठ स्नान, ज्ञान स्नान का यादगार है।

2) तिल खाना – तिल खाना, खिलाना, दान करने का भी रहस्य है। वास्तव में छोटी चीज़ की तुलना तिल से की गयी है। आत्मा भी अति सूक्ष्म है अर्थात तिल आत्म स्वरूप में टिकने का यादगार है।

3) पतंग उड़ाना – आत्मा हल्की हो तो उड़ने लगती है; देहभान वाला उड़ नहीं सकता है। जबकि आत्माभिमानी अपनी डोर भगवान को देकर तीनों लोकों की सैर कर सकता है।

4) तिल के लड्डू खाना – तिल को अलग खाओ तो कड़वा महसूस होता है। अर्थात अकेले मेँ भारीपन का अनुभव होता है। लड्डू एकता एवं मिठास का भी प्रतीक है।

5) तिल का दान – दान देने से भाग्य बनता है। अतः वर्तमान संगंयुग में हमें परमात्मा को अपनी छोटी कमज़ोरी का भी दान देना है।

6) आग जलाना – अग्नि मेँ डालने से चीज़ें पूरी तरह बदल जाती, सामूहिक आग – योगीजन संगठित होकर एक ही स्मृति से ईश्वर की स्मृति मे टिकते हैं, जिसके द्वारा न केवल उनके जन्म-जन्म के विकर्म भस्म होते हैं, बल्कि उनकी याद की किरणें समस्त विश्व में फाइल कर शांति, पवित्रता, आनंद, प्रेम, शक्ति की तरंगे फैलाती हैं।
परंतु यादगार मनाने मात्र से मानव काम क्रोध के जमावड़ों को हटाया नहीं जा सका है । हर वर्ष यह त्यौहार मनाये जाने पर भी मानव हृदय की कल्मश में कोई कमी नहीं आयी । आज यह त्यौहार विशुद्ध भौतिक रूप धारण कर गया है और इस दिन किये जाने वाले अनुष्ठानों के आध्यात्मिक अर्थ को भुला दिया है । इस दिन संस्कार-परिवर्तन, संस्कार-परिशोधन, संस्कार-दिव्यिकरण जैसा न तो कोई कार्यक्रम होता है, न लोगों को जागृति दी जाती है और न ही संस्कारों की महानता की तरफ किसी को आकर्षित किया जाता है । यदि इस पर्व को आध्यात्मिक विधि द्वारा मनाए जाए तो न केवल हमें सच्चे सुख की प्राप्ति होगी बल्कि हम परमात्म दुआओं के भी अधिकारी बनेंगे ।
संस्कार परिवर्तन के लिए 3 बातों की आवश्यकता है-
1- कमी कमजोरी को महसूस करना
2- उसको परिवर्तन करने की कार्यविधि तैयार करना
3- दृढ़ता के साथ उस परिवर्तन को कर्म में लाने का निरंतर अभ्यास करना ।
तत्पश्चात राजयोग का अभ्यास कराते हुए सेवाकेंद्र प्रभारी बी के आदर्श दीदी ने सभी को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से नए वर्ष में कुछ नया करने का संकल्प लेते हुए दृढ़ता से पिता परमात्मा का नाम प्रत्यक्ष करने का लक्ष्य रखना है और आने वाली किसी भी परीक्षा से कभी भी न घबराते हुए सदैव आगे की और अग्रसर होने का पुरुषार्थ करना है । अंत में सभी का धन्यवाद देते हुए बी के प्रह्लाद भाई ने कहा कि आपको और आपके परिवार को *मकर संक्रांति*, *पोंगल* *लोहड़ी* और *बीहू* की शुभकामनायें ।

Gwalior : Celebrating Greatness by Dr Gurcharan Singh


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हमेशा रखें याद मेरा जन्म ही महान कार्य के लिये हुआ है – बी.के. डॉ. गुरचरण सिंह
ग्वालियर: बी.के. डॉ गुरचरण भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति यदि यह याद रखे की मेरा जन्म ही महान कार्य के लिये हुआ है तो वह जीवन हर क्षण को आनंदित महसूस कर सकता है, हम सभी महानता के साथ ही इस धरा पर आते हैं, पर कभी कभी यह भूल जाते हैं|जबकि सदैव याद रखें कि हम साधारण नहीं हैं क्योंकि हम उस सर्व शक्तिमान परमपिता परमात्मा शिव की संतान हैं जो इस पूरी सृष्टि का निर्देशक है | जितना हम अपने जीवन को सराहेंगे और आनंदित होकर हर बात का उत्सव मनाएंगे, उतना ही जिंदगी हमें उत्सवों का मौका प्रदान करेगी | जीवन में छोटी छोटी बातें ही होतीं हैं जो की हमें बड़ा अनुभव कराती हैं | हमारी महानता हमारी संपत्ति पैसा या गाड़ी से नहीं आंकी जा सकती, परन्तु हमारी परिपक्वता और हमारे आस पास के वातावरण को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करने से ही हमारी महानता का अंदाजा लगाया जा सकता है |अगर हम बड़े काम नहीं कर सकते तो छोटे छोटे कामों को बड़े रूप में करने का अभ्यास करें| हमें अपने जीवन में हर एक बात का उत्सव मनाना चाहिए जैसे कि नया जॉब, सालगिरह, छोटी जीत एवं अपने जीवन में प्राप्त अवसर. इसके लिये हमें कुछ बड़ा करने की जरुरत नहीं है, सिर्फ हम जो साधारण करते हैं उससे हट कर कुछ करें | जीवन को हम जितना विशेष बनाने की कोशिश करेंगे उतना ही हमारा जीवन विशेषता संपन्न बन जायेगा, बस आवश्यकता है उन सभी छोटी बड़ी चीज़ों को महत्व देने की जिनकी वजह से हमारा जीवन विशेष बन सकता है|
जीवन को मनाने के लिये सुझाव-
1. जीवन में छोटी छोटी बातों से खुश होने की आदत डालें.
2. अपने जीवन के हर अच्छे अनुभव को सभी के साथ साझा करें.
3. हमारे जीवन के कल्याण के लिये जिन्होंने भी छोटा या बड़ा योगदान दिया है उनका आभार और साथ को स्वीकार करें.
4. अपने हर छोटे बड़े कार्य को पूरी लगन के साथ और नवीनता के साथ ख़ुशी ख़ुशी से करें|
5. हम इस धरा पर कुछ विशेष करने के लिये आये हैं इसलिए अपनी सभी विशेषताओं को कार्य में लगा कर विश्व कल्याण करने के निमित्त बनें.
अपनी उमंग उत्साह संपन्न एवं अपने जीवन की महानता को मनाने का संस्कार पक्का करने के लिये तीन बातों का अभ्यास करना चाहिए-
1- स्वमान का अभ्यास- बार बार स्वयं को अपनी महानता की स्मृति दिलाएं.
2- अपनी विशेषताएं और शक्तियों का प्रदर्शन करें- अपने आत्मसम्मान को बढ़ने के लिये अपने कर्मों द्वारा अपने अन्दर सुशुप्त पड़ी हुई विशेषताएं और शक्तियों को खोजकर उनका साक्षात्कार कराने का अभ्यास करें.
3- रात्रि सोने से पहले अपने द्वारा किये हुए अच्छे कार्यों का पोतामेल पिता परमात्मा को दें- जिसके आधार पर हमारी विशेषताओं में वृद्धि होगी और हमारी कमी कमजोरियां समाप्त हो जाएँगी |
आज से ये अभ्यास करें कि मुझे खुश होने या उत्सव मनाने के लिये किसी विशेष दिन या त्यौहार का इंतज़ार नहीं करना है, बल्कि हर घडी पिता परमात्मा की याद और उसके द्वारा दिए हुए ज्ञान के चिन्तन के आधार पर खुश रह कर जीवन को उत्सव की तरह मनाना है और सबको ख़ुशी बाँटते हुए बिताना है | स्थूल गीत और नृत्य के साथ साथ अपने मन में सदा ख़ुशी के गीत गाते उमंग उत्साह में नृत्य करना है |कैसी भी परिस्थिति में ख़ुशी को कायम रखना है|अगर हम अपने हाथ मानवता की सेवा के लिये बढाते हैं तो समझना चाहिए की मेरे हाथ उसके काम आ गए हैं |
• अगर मेरी आँखें किसी की तकलीफ देख पा रही हैं तो समझना चाहिए की वो मेरी आँखों से देख रहा है |
• अगर मेरा मुख किसी को उमंग उत्साह के दो बोल बोल रहा है तो समझें की वो मेरे मुख से बोल रहा है |
• अगर मेरे पैर उसकी सेवा के निमित्त कुछ दूर चल पा रहे हैं तो समझें की वो अपने कार्य के लिये मेरे क़दमों का इस्तेमाल कर रहा है |
• इसलिए हमेशा दिल से उससे प्रार्थना करें कि मेरे प्यारे पिता परमात्मा मैं आपकी शरण में हूँ मुझे आप अपने महान कार्य के लिये इस्तेमाल करें |